काशी में गंगा के बढ़ते जलस्तर और तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति के बीच PM मोदी ने वाराणसी नगर निगम प्रशासन से भी सीधे जानकारी ली। गुरुवार को प्रधानमंत्री ने वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी से टेलीफोन पर बातचीत कर शहर में बाढ़ की स्थिति, प्रभावित इलाकों और राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।
PM ने विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि बाढ़ के कारण घर छोड़कर शिविरों में पहुंचे लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
राहत शिविरों में भोजन-पानी और दवाओं की ली जानकारी
टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान PM ने महापौर से राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित परिवारों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।
उन्होंने पूछा कि शिविरों में खाद्य सामग्री, शुद्ध पेयजल, आवश्यक दवाएं और अन्य मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं या नहीं। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को किसी भी आवश्यक सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े और जरूरत के अनुसार तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
PM ने राहत शिविरों में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी बनाए रखने पर भी जोर दिया, ताकि बाढ़ की स्थिति के बीच प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिलती रहे।
जनप्रतिनिधि और पार्षद जनता के बीच रहें सक्रिय
प्रधानमंत्री मोदी ने आपदा प्रबंधन के दौरान जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी जनप्रतिनिधि और नगर निगम के पार्षद प्रशासन के साथ आपसी समन्वय बनाकर धरातल पर सक्रिय रहें।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि लगातार प्रभावित इलाकों और जनता के बीच मौजूद रहें तथा जरूरतमंद लोगों तक हर संभव सहायता पहुंचाने में सहयोग करें।
PM का जोर इस बात पर रहा कि राहत एवं बचाव कार्य केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के साथ उन्हें और प्रभावी बनाया जाए।
बाढ़ प्रभावितों तक तत्काल पहुंचे मदद- PM
PM ने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत कार्यों में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों की जरूरतों का लगातार आकलन करते हुए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
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उन्होंने जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और राहत कार्यों में सहयोग करने के निर्देश दिए, ताकि बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके और प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

