BHU: काशी की संस्कृति, आध्यात्मिकता और यहां के लोगों का अपनापन विदेश से आने वाले विद्यार्थियों को भी अपना बना लेता है। इसका उदाहरण काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत थाईलैंड के छात्र पैट्रिक हैं। पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन की पढ़ाई के दौरान 8.5 से अधिक सीजीपीए हासिल कर अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने वाले पैट्रिक अपने अनुभव साझा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि काशी में पढ़ाई के दौरान शिक्षकों, सहपाठियों और छात्रावास के साथियों से जो सहयोग और स्नेह मिला, उसे वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। यहां की संस्कृति, परंपराएं और लोगों का अपनापन हमेशा उनकी यादों में रहेगा।

संस्कृत और पाली के प्रति लगाव ने काशी तक पहुंचाया
पैट्रिक ने बताया कि थाईलैंड में संस्कृत और पाली भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। इन प्राचीन भाषाओं और भारतीय संस्कृति के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है। उनकी इच्छा थी कि वह ऐसे शहर में रहकर पढ़ाई करें, जिसकी पहचान विश्वभर में आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के लिए है। काशी BHU आकर उनका यह सपना पूरा हुआ।

उन्होंने कहा कि यहां उन्हें BHU पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन को करीब से समझने का अवसर मिला। अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना नहीं की थी। शिक्षकों के मार्गदर्शन और साथियों के सहयोग ने उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
BHUआने से पहले रखा संस्कृत नाम
पैट्रिक ने बताया कि भारत आने से पहले उन्होंने अपना नाम विज्ञभाग्यतारण श्रीपुण्यतुङग रखा। उनके अनुसार, उनके शहर में भारत में BHU पढ़ाई करने आने वाले विद्यार्थियों का संस्कृत में नाम रखने की परंपरा है। संस्कृत उनके लिए अनिवार्य विषय भी है। इसी कारण भारतीय संस्कृति और प्राचीन भाषाओं के प्रति उनका आकर्षण और गहरा हुआ। काशी में अध्ययन करना उनके लिए केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर भी रहा।

देव दीपावली और पंचकोशी यात्रा में लिया हिस्सा
पैट्रिक ने बताया कि काशी में पढ़ाई के दौरान उन्हें कक्षा के साथ शहर को करीब से जानने का भी अवसर मिला। हेरिटेज वॉक के माध्यम से उन्होंने यहां की ऐतिहासिक धरोहरों, खानपान और लोगों की जीवनशैली को समझा। देव दीपावली और पंचकोशी यात्रा सहित कई धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर उन्होंने भारतीय परंपराओं के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को जाना।

उन्होंने कहा कि काशी के लोग बेहद मिलनसार हैं और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए आगे आते हैं। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पढ़ाई में सहयोग करने के साथ उनकी जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं। छात्रावास में साथ रहने वाले BHU विद्यार्थियों ने भी उन्हें परिवार जैसा माहौल दिया। यही कारण है कि काशी से उनका भावनात्मक जुड़ाव बन गया।
थाईलैंड और यूरोप के दोस्तों से साझा करेंगे अनुभव
पैट्रिक भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की छात्रवृत्ति के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद उन्हें थाईलैंड लौटना होगा। भविष्य की योजनाओं के बारे में उन्होंने बताया कि वह आगे पीएचडी करने या व्यवसाय से जुड़ने के विकल्पों पर विचार करेंगे।उन्होंने कहा कि काशी में बिताए समय की यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी। यहां मिले प्रेम, सहयोग और प्रोत्साहन के अनुभव वह थाईलैंड और यूरोप में रहने वाले अपने दोस्तों के साथ भी साझा करेंगे।
भारत-थाईलैंड के आध्यात्मिक संबंधों को समझने आए पैट्रिक
बीएचयू के प्रोफेसर प्रवीण राणा ने बताया कि जब पैट्रिक ने मास्टर ऑफ ट्रैवल एंड टूरिज्म पाठ्यक्रम में दाखिला लिया, तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि पर्यटन के क्षेत्र में पहचान रखने वाले थाईलैंड का विद्यार्थी भारत आकर पढ़ाई क्यों करना चाहता है। बातचीत में पता चला कि पैट्रिक भारत और थाईलैंड के बीच आध्यात्मिक एवं धार्मिक संबंधों को समझने के इच्छुक हैं। काशी की संस्कृति और परंपराओं ने उन्हें विशेष रूप से आकर्षित किया।
प्रो. राणा के मुताबिक, पैट्रिक ने बताया कि थाईलैंड के विद्यालयों में आज भी संस्कृत और पाली पढ़ाई जाती हैं। इन भाषाओं और उनसे जुड़ी परंपराओं को समझने के लिए भारत आना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने काशी के अलावा केरल, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की यात्रा कर देश की विविध संस्कृतियों को भी करीब से जाना।
पढ़ाई और गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन से मिला सम्मान
पैट्रिक ने विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ विभिन्न गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी की। कक्षा के भीतर सीखने से लेकर बाहर आयोजित सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों तक उन्होंने उत्साह दिखाया। 8.5 से अधिक सीजीपीए हासिल करने के साथ उनके बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार दिलाया।
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पैट्रिक की उपलब्धि केवल एक विदेशी विद्यार्थी की शैक्षणिक सफलता नहीं है, बल्कि भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों की भी झलक पेश करती है। काशी में मिले अनुभवों और यहां के लोगों से बने रिश्तों को याद करते हुए भावुक हुए पैट्रिक की कहानी बताती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों को समझने और लोगों के बीच आत्मीयता बढ़ाने का माध्यम भी बनती है।

