Varanasi: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संत रामपाल के धार्मिक दावों पर सवाल उठाते हुए उन्हें शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर किए जा रहे दावों पर चर्चा शास्त्रीय प्रमाणों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए। यदि रामपाल को अपने ज्ञान पर भरोसा है, तो वे सामने आकर बताएं कि उनके विचार किन शास्त्रों पर आधारित हैं।
सोमवार को वाराणसी (Varanasi) के केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में आयोजित प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि रामपाल की पुस्तकों, बयानों और वीडियो में धर्मशास्त्रों तथा हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कही गई बातों पर गंभीर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, इन दावों से सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत हो रही हैं। ऐसे में उनका जवाब भी प्रमाण, तर्क और शास्त्रीय विवेचना के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
रामपाल के दावों पर शास्त्रीय प्रमाण मांगने की बात
शंकराचार्य ने कहा कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सनातन धर्म के विरुद्ध माने जा रहे इन विचारों को रामपाल स्वयं प्रचारित कर रहे हैं या इसके पीछे कोई अन्य शक्ति है। उन्होंने रामपाल की पुस्तकों (Varanasi) ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ में हिंदू देवी-देवताओं तथा धर्मशास्त्रों को लेकर की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाए।
प्रेसवार्ता (Varanasi) में रामपाल पर वेदों, पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोप भी उठाए गए। इसके अलावा हिंदू पर्वों, धार्मिक परंपराओं, प्रतीकों और वैदिक विवाह संस्कार को लेकर उनके विचारों की समीक्षा किए जाने की बात कही गई।
शंकराचार्य की ओर से तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ करने की चुनौती भी दी गई। उनका कहना था कि धार्मिक विषयों पर मतभेदों का समाधान व्यक्तिगत आरोपों के बजाय शास्त्रों, प्रमाणों और तर्कों के आधार पर होना चाहिए।
शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Varanasi) ने शिवांश नारायण द्विवेदी को इस विषय पर अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि शिवांश नारायण द्विवेदी रामपाल के विचारों और धर्मशास्त्रों से जुड़े उनके दावों का जवाब देने के लिए लेखन कर रहे हैं।
शंकराचार्य के अनुसार, शिवांश नारायण को प्रतिनिधि नियुक्त करने का उद्देश्य सनातन धर्म के पक्ष को व्यवस्थित ढंग से सामने रखना और संबंधित दावों का शास्त्रीय आधार पर जवाब देना है।
Varanasi: ‘रामपाल का रसातल गमन’ पुस्तक का विमोचन
प्रेसवार्ता के दौरान शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित पुस्तक ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन भी किया गया। आयोजकों के मुताबिक, इस पुस्तक में रामपाल की ओर से सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों को लेकर किए गए विभिन्न दावों तथा आक्षेपों का शास्त्रीय आधार पर जवाब देने का प्रयास किया गया है।
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कार्यक्रम में पुस्तक के प्रकाशन, मुद्रण और वितरण व्यवस्था से जुड़े सवालों के साथ लखनऊ में हुई कथित कानूनी कार्रवाई, प्राथमिकी और न्यायालय में दाखिल याचिकाओं का भी उल्लेख किया गया। आयोजकों (Varanasi) ने बताया कि इस विषय पर 18 प्रमुख बिंदुओं को शामिल करते हुए एक विज्ञप्ति भी जारी की गई है।
