लखनऊ। शनिवार को रेलवे चाइल्ड लाइन द्वारा बालिका राधिका को वन स्टॉप सेंटर, लखनऊ में आश्रय हेतु लाया गया। बालिका की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। बालिका से काउंसलिंग के दौरान बातचीत करने का प्रयास किया गया परन्तु बालिका अपने नाम के अलावा और कुछ नहीं बता पा रही थी। बालिका को सहज करने का पूरा प्रयास किया गया। दूसरे दिन बालिका की तबीयत ठीक न होने के कारण लगातार चिकित्सक की देखरेख में रखा गया। बालिका राधिका की स्थिति में कुछ सुधार आने पर बालिका से पुन: बात करने का प्रयास किया गया, जिसके दौरान उसने अपने गांव का नाम व थाना बताया।
इन सूचना को लेकर मनो सामाजिक परामर्शदाता द्वारा तत्काल राजपुर थाने पर संपर्क करके मुखिया का नंबर लिया गया और उन्हें बालिका राधिका के बारे में सूचना दूरभाष के माध्यम से दी गयी। दूसरे ही दिन पुन: मुखिया से बातचीत करने पर बालिका राधिका के परिवारजन का पता चला कि वह किसी अन्य ग्राम सभा की है। मुखिया से कहा गया कि वह उस गांव के प्रधान का संपर्क नंबर केन्द्र को उपलब्ध कराने की कृपा करें। लगातार टीम बालिका राधिका के परिवारजनों से संपर्क करने का प्रयास करती रही। फिर हेठुआँ ग्राम पंचायत के मुखिया ललन रजक से संपर्क करके बालिका राधिका के परिवारजन का पता चला। मनो सामाजिक परामर्शदाता द्वारा बालिका राधिका के पिता से बात करके उन्हें लखनऊ बुलाया गया। को बालिका राधिका के माता-पिता एवं राजपुर थाने से पुलिस वन स्टॉप सेंटर, लखनऊ के केन्द्र पर पंहुची। बिछड़ी बच्ची को पाकर माता-पिता फफक-फफककर रोने लगे और मां ने बेटी को अपने सीने से लगा लिया। बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार बालिका राधिका को उसके माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया।
sudha jaiswal

