- धनुष यज्ञ, सीता विवाह की कथा सुनकर भाव विभोर हुए कथा श्रोता
राहुल सोनी
वाराणसी। चौबेपुर क्षेत्र के सुंगुलपुर गांव में चल रही सात दिवसीय श्री राम कथा के पंचम दिवस बुधवार को धनुष यज्ञ की कथा सुनाते हुए मानस कोकिला आराधना देवी ने कहा कि धनुष अभिमान का प्रतीक है व सीता भक्ति स्वरूपा है।जीवन में यदि भगवान की भक्ति पाना हो तो अभिमान रूपी धनुष का खंडन करना ही होगा।जब तक यह अभिमान रूपी धनुष नही टूटेगा तब तक जीवन मे भक्ति का आगमन नही हो सकता।उन्होंने कहा कि विचार करने योग्य बात ये है कि प्रभु श्रीराम ने धनुष को ऊपर से नहीं तोड़ा, नीचे से भी नहीं तोड़ा, बल्कि धनुष को मध्य से तोड़ा।

ऐसा करके प्रभु ने ऐसा संदेश दिया कि धनुष अभिमान का प्रतीक है और अभिमान कभी बाल्यावस्था में नही होता,अभिमान कभी बृद्धावस्था में भी नही होता, अभिमान तो मध्य की युवावस्था में ही होता है। यही कारण है कि प्रभु ने धनुष को मध्य से तोड़कर अभिमान को तोड़ने का संदेश दिया था। मानस कोकिला ने कहा कि जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी हो और शांति स्वरूपा सिया को पाना हो तो अभिमान रूपी धनुष का टूटना आवश्यक है। इस अवसर पर प्रो ज्ञानेश्वर चौबे प्रतीक तिवारी मोहन चौबे आदि मौजूद रहे।
