
शिव की नगरी काशी में सावन के पहले सोमवार को जगत कल्याण के लिए यादव बंधुओं द्वारा सालों से दिलचस्प परंपरा को निभाया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने के लिए इस बार भी यादव बंधु बाबा विश्वनाथ (Baba Kashi Vishvanath) के धाम में पहुचे हैं। हालांकि इस बार सावन के पहले सोमवार को 21 यादव बंधुओं को बाबा विश्वनाथ (Baba Kashi Vishvanath) के गर्भगृह में प्रवेश करके जलाभिषेक की अनुमति दी गई। इसके अलावा बाकी यदुवंशी समाज के लोगों ने बाहर से ही बाबा का जलाभिषेक किया।

वहीं सरकार के इस आदेश यानि की सिर्फ 21 यादव बंधुओं को ही मंदिर (Baba Kashi Vishvanath) के गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति थी जिसको लेकर यादुवंशी समाज के लोगों में आक्रोश नजर आया। यादव बंधुओं की नाराजगी इतनी रही कि वह वहीं पर कंधों पर जल का कलशा लिए ही सड़क पर बैठ गए। ऐसे में जैसे ही उन्हें मौका मिला उन्होंने इक्ठ्ठा पुलिस प्रशासन की व्यवस्था की बेड़ियों को तोड़कर विश्वनाथ धाम के लिए प्रवेश कर गए।

Baba Kashi Vishvanath : पुलिस और यादव बंधुओं के बीच हुई नोक-झोंक
इतना ही नहीं इस दौरान पुलिस और यादव बंधुओं के बीच काफी नोक-झोंक भी हुई। लेकिन तमाम व्यवस्थाओं व बेरिगेटिंग के बावजूद भक्त सभी बंधिशों को तोड़ते हुए बाबा धाम (Baba Kashi Vishvanath) पर पहुंच गए। वो कहते हैं ना कि यदि भक्त दिल से चाहे तो उन्हें उनके अराध्य तक पहुंचने के लिए कोई नहीं रोक सकता। चाहे कितनी भी रूकावटें कितनी भी बंधिशें आ जाएं वह अपने बाबा के दरबार में पूरे जोश और उत्साह के साथ पहुंच ही जाएंगें।

इसके साथ ही वहां पर दशाश्वमेध घाट के एसीपी अवधेश पाण्डेय अपनी टीम के साथ मौजूद रहें। पुलिस अपने पूरे फोर्स के साथ तैनात रही लेकिन पुलिस के इतने जद्दोजहद व मेहनत के बाद भी यादव समाज उनकी सारी कोशिशों पर पानी फेरते हुए अन्दर प्रवेश कर गया।

मेयर अशोक तिवारी भी जलाभिषेक यात्रा में आयें नजर
इस जलाभिषेक यात्रा में यावद बंधुओं के अलावा वहां वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी अपने काफिला के साथ नजर आए। नंगे पाव और कंधों पर जल का कलश लिए मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसा अवसर मिला जब मैं बाबा के दरबार में सावन के पहले सोमवार को इस तरह हाजिरी लगाने जा रहा हूं। बाबा का आर्शीवाद मुझे मिले। मैं अपने शहर का विकार हर पहल करता रहूं यहीं कामना है।

इस दौरान सभी यादव बंधुओं (Yaduvanshi Samaj) ने हर हर महादेव और अहीर-अहीर महादेव के नारे भी लगाए। यादव बंधुओं (Yaduvanshi Samaj) की जलाभिषेक यात्रा गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, शीतला मंदिर होते हुए गंगा द्वार से होते हुए काशी विश्वनाथ (Baba Kashi Vishvanath) धाम में पहुंचें।
नई व्यवस्था के तहत अब काशी के यदुवंशी (Yaduvanshi Samaj) सावन के पहले सोमवार को मानमंदिर घाट से जल लेकर डेढ़सीपुल, साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर (Baba Kashi Vishvanath) का जलाभिषेक करना होगा जिसके बाद वह वहां से ललिता घाट गए। ललिता घाट से जल लेकर यादव बंधु अपने यात्रा के छठें पड़ाव महामृत्युंजय मंदिर की ओर रवाना हो गए।

वाराणसी के किन-किन क्षेत्रों से होते हुए आती है ये जलाभिषेक यात्रा
यदुवंशी समाज (Yaduvanshi Samaj) की सावन के पहले सोमवार को वार्षिक कलश यात्रा निकलती है। यह यात्रा केदार घाट के गौरी केदारेश्वर मंदिर से शुरू होती है। वहां बाबा का जलाभिषेक करने के बाद तिलभांडेश्वर महादेव, दशाश्वमेध स्थित शीतला मंदिर होते हुए आह्लादेश्वर महादेव जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं और फिर वहां से काशी विश्वनाथ (Baba Kashi Vishvanath), महामृत्युंजय महादेव, त्रिलोचन महादेव, ओमकारेश्वर महादेव, लाट भैरव बाबा के जलाभिषेक करने की परंपरा है।
बताते चलें कि नंगे पैर कंधे पर गंगा जल का मटका लिए यदुवंशियों (Yaduvanshi Samaj) का रेला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यादव समाज का पीतल ध्वज और डमरू बजाते युवकों के दल को देख रास्ते भर हर-हर महादेव का उद्घोष होता रहा।
क्या कहा चंद्रवंशी गोप समिति के अध्यक्ष ने
चंद्रवंशी गोप समिति के अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को यादव समाज निभाएगा। 10 जुलाई को पहले सोमवार पर इस बार भक्तों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन व मंदिर प्रशासन ने 21 यदुवंशी समाज के लोगों को गर्भगृह में जलाभिषेक की अनुमति दी है। हम लोगों की जलाभिषेक यात्रा गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, शीतला मंदिर होते हुए गंगा द्वार से श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश करेगी।

वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। हम ना तो किसी प्रकार की नई परंपरा शुरू करेंगे ना ही अपनी पुरानी परंपरा छोड़ेंगे। जो मार्ग रहा है हम उसी मार्ग से जलाभिषेक करने जाएंगे। मंदिर प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाएगा। 21 लोगों के साथ गर्भगृह में प्रवेश कर जलाभिषेक करने की अनुमति मिली है। हम प्रशासन के निर्णय के साथ हैं।