- राधेश्याम कमल
Expensiveness: महंगाई ने किसी को भी नहीं छोड़ा। महंगाई की मार से जहां आमजन त्रस्त है, वहीं इस बार दशानन भी महंगाई की गिरफ्त में आ गया है। महंगाई की डायन ने अट्टहास लगाने वाले दशानन को भी नहीं बख्शा। अब रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद महंगाई की मार झेल रहे हैं।
विजय पर्व के रूप में मनायी जाने वाली विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतलों का दहन किये जाने की परम्परा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। असत्य पर सत्य की विजय के रूप में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले तो लगभग बन कर तैयार हो गये हैं लेकिन महंगाई की मार से सभी पुतले डगमगा रहे हैं।
इसके पीछे वजह यह है कि पुतलों में लगने वाले सामानों में कई-कई गुना वृद्धि [Expensiveness] हो चुकी है। बावजूद इसके पुतले तैयार किये गये हैं। विजयादशमी पर रामनगर में 50 फुट के पुतले का दहन किया जायेगा। जबकि बरेका में 75 फुट, मलदहिया में 40 फुट का रावण का पुतला दहन होगा। इसके साथ ही लाटभैरव समेत कई जगहों पर पुतला दहन किया जाता है।
Expensiveness: पुतलों को तैयार करने में सामानों के दामों में वृद्धि
पुतलों को बनाने वाले मंडुवाडीह के शमशाद खां बताते हैं कि पुतलों को बनाने में लगने वाले सामानों के दामों में कई गुना वृद्धि [Expensiveness] हो चुकी है। पुतलों को तैयार करने में बांस, तांत, पुरानी साड़ियां, अखबार, रंगीन कागज, कलर,कटिया,सुतली आदि लगती है।
बरेका में रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतलों को उन्होंने तैयार किया है। तीनों पुतले बन कर तैयार हैं। रावण 75 फुट, कुंभकर्ण 65 फुट व मेघनाद 60 फुट का है। इनमें 40 हजार रुपये की आतिशबाजी [Expensiveness] लगायी जायेगी। तीनों पुतलों में 100 बांस, डेढ़ क्विंटल तांत, दो क्विंटल मैदा, 200 पीस साड़ियां, 50 किलो अखबार, दो सौ लीटर कलर लगाया गया है। 30 किलो सुतली लगायी गई है।
सुतली पहले 50-60 रुपये किलो थी अब 150 रुपये किलो है। तांत 300 रुपये किलो, अखबार 30 रुपये किलो मिल रहा है। एक बांस 430 रुपये का मिल रहा है। 100 रुपये का था। पुतलों को तैयार करने में लगे हर कारीगरों को रोजाना 400-500 रुपये देना पड़ता है। पुतलों में लगने वाले हर सामानों के दामों में इतनी वृद्धि [Expensiveness] हो गई है कि उसे झेल पाना बड़ा मुश्किल कार्य है।

पुतलों को तैयार करने में दो महीने से लगा रहता है पूरा परिवार
रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों को तैयार करने में शमशाद के अलावा उनके पुत्र असलम खां, शाहिद खां, आर्यन खां समेत उनका पूरा परिवार जुटा रहता है। वे बताते हैं कि बरेका के तीनों पुतले दो महीने से बना रहे हैं। इसमें उनका पूरा परिवार लगा हुआ है। इनमें 15-16 लोग लगे हुए हैं। इनमें उनके परिवार की महिलाएं भी लगी रहती हैं। फिलहाल पुतले बन कर तैयार हैं। पुतलों को लगाने की तैयारी चल रही है।
Highlights
ओंकार शर्मा भी कई पीढ़ियों से पुतला बना रहे
रामनगर मछरहट्टा निवासी ओंकार शर्मा पुतला बनाने के कार्य में पिछले कई सालों से लगे हैं। उनकी तीन पीढ़ियां इसमें लगी हुई है। वे प्रसिद्ध मौनी बाबा की रामलीला में रावण का पुतला बनाते हैं। इस बार भी उन्होंने 40 फुट के रावण का पुतला तैयार किया है। वे प्रयागराज में लगभग ढाई लाख रूपये की लागत से रावण का पुतला तैयार कर रहे हैं। उनके साथ 40 कारीगर भी लगे हुए हैं।
बताते हैं कि पहले उनके दादा स्व. सहदेव शर्मा पुतला बनाया करते थे। वे बताते हैं कि दस फुट का रावण 25 हजार व 15 से 20 फुट का रावण 30 हजार का है। वे बताते हैं कि पुतलों में लगने वाले हर सामानों का दाम बढ़ गया है। इसके चलते पुतलों की भी कीमत बेतहासा बढ़ गई है। बांस, सुतली, कटिया, कागज से लेकर मैदा सभी के दाम आसमान छू रहे हैं। वे रावण के अलावा जटायु, कौआ, सोने का हिरण आदि पुतले भी बनाते हैं। उनका कहना है कि वे अब इस धंधे में [Expensiveness] अपने बच्चों को नहीं लगाना चाहते हैं।

