Flight Visibility: ठण्ड और कोहरे का प्रभाव बढ़ते ही विमानों के लिए भी खतरा मंडराने लगा है। हवाई अड्डे पर कोहरे और धुंध के कारण अक्सर विमानों के उड़ने और रनवे पर उतरने में समस्या होती है।
मौसम में बदलाव की वजह से लो विजिबिलिटी [Flight Visibility] यानी कम दृश्यता की वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित होती हैं। कोहरे और धुंध के कारण कई विमान या तो कैंसिल हो जाती हैं या फिर निर्धारित समय से काफी लेट हो जाती हैं। खराब मौसम में 800 से कम दृश्यता हो जाने पर विमानों को रन वे पर उतरने में समस्या उत्पन्न होती है।
विमान के विलंब और डायवर्ट होने की स्थिति में आप अगर हवाई सफर कर रहे हों तो ऐसे में मन में एक खीझ सी पैदा हो जाती है। लेकिन अहम बात यह है कि विमान रद्द करने या लेट होने का निर्णय विमान यात्रियों की सुरक्षा के लिए ही किया जाता है। दरअसल, फॉग यानी कुहासा के कारण विमानों को आसमान में उड़ने में परेशानी [Flight Visibility] तो होती ही है। यह हवाई अड्डे के ऑपरेशन्स को भी काफी हद तक प्रभावित करता है। इसके कारण कम्यूनिकेशन में भी दिक्कतें आती हैं और स्थिति को देखते हुए नए प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं।
टेक ऑफ़ या लैंडिंग मुख्य समस्या नहीं
सामान्य स्थितियों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट नक्शे और संकेतों के माध्यम से विमान की गति और दिशा को नियंत्रित करते हैं। जब हवाई अड्डे पर कोहरा [Flight Visibility] छाता है तो विजिबिलिटी 600 मीटर तक कम हो जाती है और यह एलवीपी यानी कम विजीबिलिटी प्रक्रियाओं में बदल जाते हैं। इस कारण उड़ानों के सुरक्षित संचालन में देर होने को प्रभावित करता है।
एविएशन से जुड़े जानकारों के मुताबिक, कोहरे [Flight Visibility] के दौरान उड़ान का सबसे मुश्किल हिस्सा टेक ऑफ़ या लैंडिंग नहीं बल्कि फ्लाइट को रनवे पर टैक्सीइंग कराना होता है। जब विमान को रनवे पर लेकर जा रहे होते हैं, तो रनवे पॉइंट्स काफी अलग होते हैं। विमान को उड़ान भरते समय अधिकतम दूरी तय करने के लिए सामान्य से अधिक दूरी वाले होल्डिंग पॉइंट्स पर जाना होता है। ऐसे में होल्डिंग पॉइंट्स में कई मीटर्स की दूरी बढ़ जाती है।
जबकि पॉइंट GUY के अनुसार कोहरे [Flight Visibility] के दौरान रनवे तक जाना और भी जोखिम भरा हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लो विजिबिलिटी के समय एक व्यस्त रनवे पर दुर्घटना होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है ऐसे में विमान का चालक कई बार पूरी तरह से विमान को रोक कर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मदद लेते हैं ऐसा वे तब भी करते हैं जब वे काफी पास भी क्यों ना हों।
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Flight Visibility: रनवे पर पहुंचने के बाद की चुनौती
जब विमान सफलतापूर्वक रनवे पर पहुंच जाता है तो उसे फिर से विजिबिलिटी [Flight Visibility] का आकलन करना होता है। प्रत्येक विमान के प्रकार और हवाई अड्डे के पास टेक ऑफ़ के लिए न्यूनतम विजिबिलिटी की आवश्यकता होती है, जो रनवे के सभी बिंदुओं पर अलग होती है। एक बार विमान रनवे के सभी बिंदुओं पर न्यूनतम विजिबिलिटी के मानदंड को पूरा कर ले तभी वो टेक ऑफ़ कर सकता है। इसके अलावा रनवे को भी तब तक साफ रखा जाता है, जब तक विमान हवा में न पहुंच जाए।
इसका मतलब है कि कोई अन्य विमान तब तक होल्डिंग पॉइंट में प्रवेश नहीं कर सकता, जब तक कि विमान हवा में सुरक्षित न पहुंच जाए। इस वजह से भी सामान्य यातायात में देरी हो जाती है। एक बार टेक ऑफ़ रोल शुरू होने के बाद पायलट सुनिश्चित करते हैं कि विमान पूरी तरह से केंद्रित है और असामान्य स्थितियों की निगरानी करते रहते हैं। ऐसे समय में केवल यही आशा की जा सकती है कि एटीसी ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि रनवे पर कोई रुकावट नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुर्घटना होने से पहले इसे देखने का कोई और तरीका नहीं है।
न्यूनतम विजिबिलिटी के दौरान
पायलटों के लिए विमान की लैंडिंग एक कॉम्प्लिकेटेड काम होता है। फ्लाइट डैक फ्रंड के अनुसार, मैनुअल लैंडिंग के लिए आवश्यक न्यूनतम विजिबिलिटी 550 मीटर होती है इसलिए पायलटों को लैंडिंग के लिए ऑटो पायलट पर निर्भर होना चाहिए जहां कम विजिबिलिटी [Flight Visibility] होती है। वहां उतरने के लिए घने कोहरे के दौरान विमान से कम्यूनिकेशन स्थापित होना आवश्यक है। इसके लिए हवाई अड्डों के पास उच्च-स्तरीय आई एल एस यानी इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम होना जरूरी बताया जाता है।
बढ़े रनवे तो दूर हो समस्या
वर्तमान समय मे हवाई अड्डे के रनवे की लंबाई करीब 2746 मीटर के करीब है। इस वजह से इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम को अपग्रेट नही किया जा सकता। रनवे विस्तार के बाद ही आई एल एस प्रणाली को अपग्रेड कर उच्च स्तरीय उपकरणों को इंस्टॉल किया जा सकता है। हवाई अड्डे पर लगे आई एल एस सिस्टम की क्षमता 900 मीटर दृश्यता की है। इससे कम दृश्यता होने पर विमानों का परिचालन प्रभावित होता है।
बाबतपुर एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने बताया कि विमान को रन वे पर उतरने के लिए 900 मीटर दृश्यता की आवश्यकता होती है। इससे कम दृश्यता होने पर हवाई परिचालन में समस्या उत्पन्न होती है। वर्तमान समय में रन वे की लम्बाई 2746 मीटर है। रन वे विस्तार के बाद उच्च स्तरीय इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को अपग्रेट किया जा सकता है।