BHU के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत पोस्टमार्टम से पहले परिजनों की सहमति लेकर नेत्रदान किया जाएगा। यह पहल पूर्वांचल में आईएमएस बीएचयू को इस दिशा में आगे बढ़ाने वाला पहला मेडिकल कॉलेज बना चुकी है। दो दिन पहले बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस में पहला सफल नेत्रदान भी हो चुका है।
BHU: शव के परिजनों की सहमति से नेत्रदान संभव
बीएचयू (BHU) और अन्य अस्पतालों में कई लोग दृष्टि दोष की समस्या के कारण कार्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता महसूस करते हैं। आईएमएस बीएचयू के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने बताया कि लायंस आई बैंक सोसायटी के साथ मिलकर पोस्टमार्टम हाउस में कार्निया रेट्रीवल प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिससे शव के परिजनों की सहमति से नेत्रदान संभव हो सकेगा।
लायंस आई बैंक सोसायटी के सचिव डॉ. अनुराग टंडन ने बताया कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद 6 घंटे तक कार्निया सुरक्षित रहती है, और इस अवधि में नेत्रदान करवाया जा सकता है। आईएमएस बीएचयू (BHU) के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे फोरेंसिक मेडिसिन विभाग का उत्कृष्ट कदम बताया, और इसमें पूरी मदद का आश्वासन दिया।


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