सावन के पहले सोमवार यानी 14 जुलाई 2025 को काशी एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा का भव्य रूप देखेगी, जब 50 हजार से अधिक यादव श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) का पारंपरिक जलाभिषेक करेंगे। वर्ष 1932 से चली आ रही इस परंपरा को लेकर इस बार व्यवस्था और सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) धाम में आयोजित बैठक में मंदिर ट्रस्ट, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस विभाग और यादव समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें जलाभिषेक यात्रा के सफल आयोजन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। यादव समाज की धार्मिक परंपरा को सम्मान देते हुए प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
जलाभिषेक यात्रा परंपरा के अनुरूप ही होगी आयोजित
बैठक में स्पष्ट किया गया कि वर्ष 1932 से चली आ रही यह जलाभिषेक यात्रा परंपरागत स्वरूप में ही निकाली जाएगी। भक्तगण तय मार्गों से होते हुए बाबा दरबार पहुंचेंगे और विधिवत जल अर्पित करेंगे। इसके लिए विशेष समितियाँ गठित की गई हैं जो व्यवस्था से लेकर अनुशासन तक का जिम्मा संभालेंगी।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के होंगे खास इंतज़ाम
बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए इस बार सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की जा रही है। संपूर्ण धाम परिसर (Kashi Vishwanath) को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। एक कंट्रोल रूम भी स्थापित होगा जहां से यात्रा और दर्शन की पूरी निगरानी रखी जाएगी।
धूप–बारिश से बचाव के लिए शेड और जिंग–जैग बैरिकेडिंग
श्रद्धालुओं को धूप और बारिश से बचाने के लिए मार्ग में शेड बनाए जाएंगे। साथ ही बाबा दरबार (Kashi Vishwanath) के भीतर जिंग-जैग बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था बाधित न हो।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे श्रावण मास, जो नौ अगस्त तक रहेगा, विशेष सावधानी बरती जाएगी। जलाभिषेक, दर्शन और सुरक्षा से संबंधित सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर की होंगी।

