Varanasi: हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी साहित्य भारती वैश्विक मंथन कार्यक्रम का भव्य आयोजन वाराणसी में किया गया। वाराणसी के कचहरी स्थित एलटी कॉलेज में इसका आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां भारती एवं मां सरस्वती के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. के.एन. त्रिपाठी ने नवगठित कार्यकारिणी को आशीर्वाद दिया। इसके बाद सरस्वती वंदना और संगठन का ध्येय गीत प्रस्तुत किया गया। संगठन का मुख्य उद्देश्य “मानव बन जाए जग सारा, यह पावन संकल्प हमारा” बताते हुए मुख्य अतिथि डॉ. नीरजा माधव ने कार्यक्रम की सराहना की।
Varanasi: सभी भाषाओँ के बीच एक सेतु है हिंदी भाषा
इस मौके पर डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि यह हिंदी और साहित्य के लिए समर्पित एक संस्था है और इसका पहला अधिवेशन काशी (Varanasi) में होने जा रहा है। हमें लगता है कि भारत के ज्ञान परंपरा और सहित्य को विश्व क्षितिज पर स्थापित करने के लिए यह बेहद आवश्यक है। इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए हिंदी को समझाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत की अन्य भाषाएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है लेकिन उनके बीच एक समपर्क भाषा का होना जरूरी है जो एक सेतु का काम करें और वो भाषा हिंदी ही हो सकती है।

नई कार्यकारिणी का ऐलान संगठन के अंतर्राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर काशी प्रांत के प्रभारी हरिश्चंद्र त्रिपाठी ने संगठन की गतिविधियों और उद्देश्यों (Varanasi) पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कंचन सिंह परिहार, संतोष कुमार प्रीत, गुरु प्रसाद गुम्रा और रजनीकांत त्रिपाठी ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ कर माहौल को साहित्यिक रंग से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन काशी प्रांत के सह प्रभारी विनोद कुमार वर्मा ने किया।
कार्यक्रम (Varanasi) के समापन से पूर्व बसंत राय भट्ट ने मंचासीन अतिथियों, श्रोताओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।

