Operation Sindoor: देश की सुरक्षा नीति में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाते हुए भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के महज पांच महीने के भीतर 93 हजार करोड़ रुपये से अधिक के हथियार और सैन्य उपकरण खरीद डाले। यह रकम चालू वित्त वर्ष 2025-26 के कुल डिफेंस बजट के पूंजीगत व्यय का लगभग 50 प्रतिशत है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सितंबर 2025 तक ₹92,211.76 करोड़ का उपयोग किया जा चुका है।
इस तेज़ खर्च का मकसद स्पष्ट है — सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण (Operation Sindoor) को गति देना और आवश्यक सैन्य प्रणालियों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना। मंत्रालय का मानना है कि इस त्वरित निवेश से आने वाले महीनों में रक्षा उत्पादन, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्र में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा।
Operation Sindoor: हवाई ताकत पर सबसे अधिक निवेश
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सर्वाधिक खर्च विमानों और हवाई इंजनों पर किया गया है। इसके बाद थल सेना के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, आयुध, प्रक्षेपास्त्र प्रणाली और संचार नेटवर्क की खरीद पर बड़ी राशि खर्च हुई है। पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में रक्षा मंत्रालय ने 1.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 100 प्रतिशत उपयोग किया था, जो इस साल और अधिक गति पकड़ता दिख रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पूंजीगत व्यय
रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय सिर्फ उपकरण खरीदने का मामला नहीं है — यह नई परिसंपत्तियों के निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और सीमावर्ती अवसंरचना को मजबूत करने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
इससे देश की रणनीतिक तैयारी, रक्षा निर्माण (Operation Sindoor) में आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन — तीनों क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं को भी नया बल मिलेगा।
आधुनिकीकरण की दिशा में निर्णायक वर्ष
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस वित्त वर्ष को “मॉडर्नाइजेशन मिशन ईयर” के रूप में देखा जा रहा है। वायुसेना के लिए अत्याधुनिक फाइटर जेट्स, नौसेना के लिए युद्धपोत और पनडुब्बियां, और थल सेना के लिए नई तोपें और मिसाइल सिस्टम (Operation Sindoor) की खरीद प्रक्रियाएं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इससे भारत की सामरिक क्षमता में न सिर्फ गुणात्मक वृद्धि होगी, बल्कि पड़ोसी सीमाओं पर उसकी सतर्क निगरानी क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी।
पांच साल में 60% की वृद्धि
पिछले पांच वर्षों में सेना के पूंजीगत व्यय में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2020-21 में जहां यह आवंटन करीब ₹1.13 लाख करोड़ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है।
यह बढ़ोतरी भारत की रक्षा प्राथमिकताओं में लगातार होती मजबूती और ‘फ्रंट-लोडेड’ डिफेंस बजट उपयोग नीति को दर्शाती है, जिसके तहत बजट का बड़ा हिस्सा वित्त वर्ष के शुरुआती चरणों में ही उपयोग कर लिया जाता है ताकि परियोजनाओं में देरी न हो।
मंत्रालय का रुख
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि व्यय की यह गति और वर्तमान में स्वीकृति प्रक्रिया में चल रही बड़ी परियोजनाएं यह सुनिश्चित (Operation Sindoor) करेंगी कि वित्त वर्ष के अंत तक पूंजीगत आवंटन का पूर्ण उपयोग हो सके। साथ ही मंत्रालय अब संशोधित अनुमानों पर भी काम कर रहा है ताकि वर्ष के अंत तक फंड उपयोग अधिकतम हो।
सामरिक मजबूती की ओर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा रणनीति अब पूरी तरह स्मार्ट मॉडर्नाइजेशन और देशी तकनीक पर निर्भरता के मॉडल की ओर बढ़ रही है। देश की रक्षा उद्योग इकाइयां और निजी क्षेत्र (Operation Sindoor) की कंपनियां संयुक्त रूप से नए ड्रोन सिस्टम, AI आधारित हथियार प्लेटफॉर्म, और स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणाली पर काम कर रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रणनीति आने वाले दशक में भारत को “डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब” के रूप में स्थापित कर सकती है — जहां भारत न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि रक्षा निर्यात में भी वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाएगा।

