उत्तर प्रदेश किसान कांग्रेस (पूर्वी जोन) के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष संजय चौबे (Sanjay Chaube) ने गुरुवार को कचहरी स्थित शाही दरबार परिसर में प्रेस वार्ता कर स्मार्ट मीटर, प्रीपेड मीटर और सौर ऊर्जा योजना से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर सरकार और विद्युत विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं के चलते जनता परेशान है और विद्युत बिलों में लगातार असामान्य बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।
संजय चौबे (Sanjay Chaube) ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधारी गई तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी – Sanjay Chaube
उन्होंने बताया कि 26 जुलाई 2025 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PUVVNL) के एमडी और UPPCL के चेयरमैन को ईमेल भेजकर स्मार्ट मीटर में “रीडिंग जंपिंग” की शिकायत दर्ज कराई थी।

उनका कहना था कि उनके यहां लगे 4.44 किलोवॉट लोड वाले स्मार्ट मीटर की तुलना में चेक मीटर ने मात्र 24 दिनों में 0.7 यूनिट कम रीडिंग दिखाई, जबकि HPL कंपनी के इलेक्ट्रॉनिक मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर ने महीने में 9 यूनिट अधिक बिजली दर्ज की।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यह फर्क “नॉर्मल” कैसे माना जा सकता है, तो अधिकारियों ने मौखिक रूप से इसे सामान्य बताया लेकिन लिखित रूप में जवाब देने से इनकार कर दिया।
UPPCL वेबसाइट पर छिपाए जा रहे हैं आंकड़े
संजय चौबे (Sanjay Chaube) ने कहा कि 19 जुलाई 2025 तक यूपीपीसीएल की वेबसाइट के अनुसार प्रदेशभर में 2.69 करोड़ (26979055) स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 1,39,667 उपभोक्ताओं ने अपने यहां चेक मीटर लगवाए हैं।
फिर भी विभाग ने यह जानकारी साझा नहीं की कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग, चेक मीटर की तुलना में बराबर, कम या ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग जानबूझकर यह डेटा छिपा रहा है क्योंकि अगर यह सार्वजनिक हो जाए तो “बिजली विभाग की पोल खुल जाएगी।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि “जहां खरबों यूनिट की खपत होती है, वहां 0.7 यूनिट के अंतर से भी लाखों यूनिट का घोटाला संभव है। इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।”
ऑनलाइन शिकायतें हजारों में, लेकिन कार्रवाई शून्य
पूर्व प्रवक्ता ने बताया कि 25 जुलाई 2025 तक प्रदेशभर में 1912 पोर्टल पर 40,895 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई थीं, जबकि ऑफलाइन शिकायत करने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
संजय चौबे (Sanjay Chaube) ने कहा कि प्रधानमंत्री सौर्य घर योजना के तहत उपभोक्ताओं को यह वादा किया गया था कि बिजली बिलों में 70% तक कमी आएगी, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक उपभोक्ता के यहां अगस्त माह में सोलर पैनल ने 333 यूनिट बिजली उत्पन्न की, लेकिन बिल में केवल 168 यूनिट को ही माइनस किया गया। उन्होंने (Sanjay Chaube) सवाल उठाया कि “जब सिस्टम ऑन-ग्रिड है, तो सारी सौर बिजली पहले एक्सपोर्ट होनी चाहिए और फिर इंपोर्ट बिजली से एडजस्ट की जानी चाहिए। परंतु विभाग का सिस्टम उपभोक्ता के खिलाफ काम कर रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग द्वारा सोलर बिजली का बकाया ₹2.5 से ₹3 प्रति यूनिट के हिसाब से अगले साल के बिल में समायोजित करने का प्रावधान “पूरी तरह अन्यायपूर्ण और ठगी जैसा” है, क्योंकि उद्योगपतियों से यही बिजली इससे कई गुना अधिक दर पर खरीदी जाती है।
संजय चौबे (Sanjay Chaube) ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता को प्रीपेड या पोस्टपेड कनेक्शन चुनने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीपीसीएल और राज्य सरकार ने UPERC (उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग) की अनुमति के बिना ही सितंबर से पोस्टपेड मीटरों को प्रीपेड में बदलना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जनता हर महीने बढ़ते बिलों से परेशान है और सरकार मौन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्मार्ट मीटर और प्रीपेड सिस्टम वापस नहीं लिए गए और सौर योजना की खामियों को ठीक नहीं किया गया तो कांग्रेस कार्यकर्ता जन आंदोलन छेड़ देंगे।

