Cough Syrup: वाराणसी के महमूरगंज इलाके में एक साधारण दवा की दुकान है – राधिका इंटरप्राइजेज। यहीं से एक नौजवान ने दवा का ककहरा सीखा और कुछ ही सालों में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का सरताज बन बैठा। नाम है शुभम जायसवाल। आज वह दुबई में छिपा बैठा है, लेकिन उसका बनाया तस्करी का जाल उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है।
एक दुका से शुरू हुआ सफ़र, तस्करी का किंग बन गया
कोरोना काल में जब दवाइयों का कारोबार आसमान छू रहा था, शुभम राधिका इंटरप्राइजेज में नौकरी कर रहा था। उसने देखा कि एक साधारण कफ सिरप की बोतल कितने मुनाफ़े की चीज़ हो सकती है। बस वहीं से दिमाग़ ने दौड़ना शुरू किया। नौकरी छोड़ी, रांची में अपनी फर्म खोली, गोदाम बनवाए और कोडीन वाली सिरप (Cough Syrup) की खेप बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने लगा।

आज औषधि विभाग की जांच में राधिका इंटरप्राइजेज और उसके मालिक भी आरोपी बन चुके हैं। विभाग ने अब तक 126 फर्मों को चिह्नित किया है, 39 की गहन जांच पूरी हो चुकी है और 40 लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। बाक़ियों के खिलाफ भी जल्द FIR होगी।
100 रुपये की बोतल, बांग्लादेश में 500-600 में
भारत में 90-110 रुपये में मिलने वाली फेंसेडिल या इसी तरह की कोडीन सिरप बांग्लादेश में 400 से 600 रुपये तक बिकती थी। वजह? वहाँ इसका इस्तेमाल खांसी की दवा (Cough Syrup) के रूप में नहीं, नशे की सस्ती शराब के रूप में होता है।

बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों में कट्टर इस्लामी सोच तेज़ी से बढ़ी है। इस्लाम में शराब सख़्त हराम है। वहाँ के नौजवान के लिए 600 रुपये में ऐसी चीज़ मिल जाए जो शराब जैसा नशा दे और धर्म की किताब में हराम भी न लिखी हो – सुनहरा मौक़ा था। एक बोतल पीयो(Cough Syrup), नींद आए, सुस्ती छाए और मज़हब भी बचा रहे। मांग इतनी कि तस्करों को बस सप्लाई बढ़ाते जाना था।
हवाला, फर्ज़ी फर्में और 2000 करोड़ से ज़्यादा का घोटाला
शुरुआत में अनुमान था कि पूरा खेल सौ करोड़ का होगा। अब जांच कहती है – दो हज़ार करोड़ से कहीं ज़्यादा। पैसा हवाला से आता था, बनारस और आसपास के जिलों में फर्ज़ी फर्मों के ज़रिए सैटल होता था। शुभम ने झारखंड में फर्में खोलीं, गोदाम बनवाए और बंगाल बॉर्डर के रास्ते माल पार कराया जाता था।
डॉक्टर ने बताया– असल में होता हैक्या
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. गौरव जोशी बताते हैं, “कोडीन युक्त सिरप सूखी खांसी में दी जाती है। यह दिमाग को सुस्त करती है, नींद लाती है और खांसी (Cough Syrup) में आराम देती है। बच्चों को बहुत कम मात्रा में दी जाती है। लेकिन एक पूरी 100 ml की बोतल कोई वयस्क पी ले तो भरपूर नशा होता है। जहाँ शराब महँगी या प्रतिबंधित हो, वहाँ गरीब तबके के लोग इसी को शराब की जगह इस्तेमाल करते हैं।”

अब क्या?
शुभम दुबई में है। उसका जाल अभी भी ज़िंदा है। औषधि विभाग धीरे-धीरे लेकिन पक्के सबूतों के साथ केस मजबूत कर रहा है। सवाल सिर्फ़ एक तस्कर का नहीं है – सवाल उन सैकड़ों फर्ज़ी फर्मों का है, उन गोदामों का है और उस सोच का है जो धर्म की आड़ में नशे(Cough Syrup) को जायज़ ठहराती है।
एक साधारण दवा की दुकान से निकला यह लड़का आज अंतरराष्ट्रीय तस्करी का पोस्टर बॉय बन चुका है। और उसकी बनाई सिरप (Cough Syrup) की बोतलें आज भी कहीं न कहीं बॉर्डर पार कर रही होंगी – नशे के नाम पर, धर्म की आड़ में।

