देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (Indigo) इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। लगातार पांचवें दिन भी फ्लाइट कैंसिलेशन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले चार दिनों में ही 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें आसमान छू रही हैं।
एयरपोर्ट बने रेलवे स्टेशन, यात्री फर्श पर सोने को मजबूर
दिल्ली से लेकर मुंबई और बेंगलुरु तक, हर बड़े एयरपोर्ट पर हालात बेकाबू हैं। यात्रियों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि एयरपोर्ट किसी रेलवे स्टेशन जैसा नजर आ रहा है। लोग घंटों इंतजार के बाद थककर फर्श पर ही सोने को मजबूर हैं। खाने-पीने और ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं, एयरलाइन (Indigo) की ओर से होटल या भोजन का इंतजाम न होने पर गुस्सा और निराशा साफ झलक रही है।
सूट के सोंका अंबार, यात्रियों की चीख-पुकार
जहां नजर जाती है वहां सूटकेस और बैग्स का ढेर दिखाई देता है। बदहवास यात्री रोते, चीखते और मदद की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं। हालात ऐसे हैं कि देशभर का हवाई सफर सिस्टम मानो पूरी तरह चरमरा गया हो।
माफी के बावजूद हालात जस के तस
इंडिगो (Indigo) ने बीते दिन यात्रियों से माफी जरूर मांगी, लेकिन राहत की कोई ठोस तस्वीर सामने नहीं आई। आज भी सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल होने के आसार हैं। यात्रियों का कहना है कि एयरलाइन की माफी से ज्यादा उन्हें व्यवस्था और भरोसे की जरूरत है।
यह संकट केवल एक एयरलाइन की विफलता नहीं, बल्कि देश के एविएशन सिस्टम की नाजुकता को उजागर करता है। जब (Indigo) यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलतीं, तो सवाल उठता है कि क्या हमारी हवाई यात्रा व्यवस्था केवल मुनाफे के लिए है या यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी।

