UP: बलिया से उठी एक चीख अब पूरे प्रदेश में गूंज रही है। आयुष यादव हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आयुष की छोटी बहन का दर्द और गुस्सा साफ झलकता है। न्याय की उम्मीद टूटने पर उसने प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए कहा है— “अगर मेरे भाई के हत्यारों को पुलिस (UP) ने सजा नहीं दी, तो मैं खुद उन्हें गोली मार दूंगी।”
बहन का आक्रोश
शुक्रवार की शाम घर के पास आयुष को गोलियों से छलनी कर दिया गया। खून से लथपथ हालत में उसने बहन को हत्यारों के नाम बताए थे। परिवार ने चार युवकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई। बहन का आरोप है कि पहले भी इन्हीं लोगों ने हमला किया था, शिकायत के बावजूद पुलिस (UP) ने कार्रवाई नहीं की। यही सुस्ती अब उसे बंदूक उठाने की चेतावनी देने पर मजबूर कर रही है।
‘बुलडोजर न्याय’ की मांग
वायरल वीडियो में बहन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘बुलडोजर न्याय’ का हवाला देती है। उसकी मांग है कि हत्यारों के घर ढहाए जाएं और उन्हें ऐसी सजा मिले कि कोई दोबारा इस तरह की जुर्रत न कर सके। बहन का कहना है कि वह मौत से नहीं डरती और भाई के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
UP:नामजद आरोपी अब भी फरार
मऊ के मधुबन थाना (UP) क्षेत्र के जलपुरवा निवासी रॉबिन सिंह, उभांव के मझवलिया निवासी पवन सिंह, कस्बा के राज और रोहित पर हत्या का केस दर्ज है। पुलिस का दावा है कि चार टीमें आरोपियों की तलाश में लगी हैं, कुछ लोगों से पूछताछ भी हो रही है। लेकिन मुख्य आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर हैं।
इलाके में तनाव
वीडियो वायरल होने के बाद बलिया पुलिस (UP) और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पीड़िता के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच हो रही है और दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। बावजूद इसके, जनता में यह धारणा गहरी हो रही है कि न्याय में देरी अपराधियों को बचाने का काम करती है।
वर्चस्व की जंग में गई जान
पुलिस (UP) सूत्रों के मुताबिक, आयुष यादव उर्फ राहुल स्थानीय युवकों के एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा था, जहां गुटबंदी और वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई थी। इसी विवाद ने मां-बाप के इकलौते बेटे की जान ले ली। मृतक और आरोपियों पर पहले भी मारपीट के मुकदमे दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सिस्टम (UP) पर भरोसा खोते समाज की आवाज है। न्याय की देरी अब सीधे चुनौती में बदल रही है।

