वाराणसी। काशी विश्वनाथ परिसर (Kashi Vishawanath Temple) में स्पर्श दर्शन पर किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। सोमवार को सुबह से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे खबरों का वाराणसी के मंडलायुक्त ने खंडन किया है। कमिश्नर कौशल राज शर्मा ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में स्पर्श दर्शन को लेकर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि न्यास की बैठक में लोगों ने अपने बातों को रखा था। लेकिन उसपर विचार नहीं किया गया। वहीँ इस मुद्दे पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने भी कहा कि ऐसा कोई फैसला अभी तक नहीं लिया गया।
कमिश्नर ने बताया कि इससे पहले न्यास के बैठक में एक छोटी सी चर्चा हुई थी। जिसमें भारत के कई मंदिरों का तुलनात्मक अध्ययन किया था। उन्हीं चर्चाओं में से एक चर्चा इस बात पर भी हुई थी कि तमाम मंदिरों में इस तरह का शुल्क लगता है। उन्होंने कहा कि फ़िलहाल स्पर्श दर्शन के लिए इस तरह का कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। भविष्य में यदि ऐसा कुछ होता है, तो इसकी जानकारी दी जाएगी। हेल्पडेस्क के माध्यम से जो शुल्क लगते हैं, वे वहीँ पर लागू हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो। नागेंद्र पाण्डेय ने कहा कि पिछले न्याय की बैठक में दो मिनट के लिए चर्चा हुआ था कि मंदिर की भीड़ को देखते हुए क्यों न शुल्क लगा दिया जाय। लेकिन उसपर कोई विचार नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार का शुल्क लगाया गया है।
भीड़ को नियंत्रित करने हेतु लिए जा सकते हैं ऐसे फैसले
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस तरह के फैसले पर विचार किया जा रहा है। यह एक पक्ष है, वहीँ दूसरा पक्ष यह है कि शुल्क के कारण निर्धन व्यक्ति बाबा के दर्शन से वंचित न हो जाए। इस पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगले बैठक में इस तरह की बातों पर प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि एक सुझाव आया था कि उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए शुल्क लगते हैं। लेकिन हमें समाज के अंतिम व्यक्ति के बारे में भी सोचना है कि धन के अभाव में वह बाबा के दर्शन से अछूता न रहे।

