Varanasi: उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आम आदमी पार्टी की “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा रविवार को तीसरे दिन वाराणसी में प्रवेश कर गई। मिर्ज़ापुर से शुरू हुई यह पदयात्रा आप के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में गीता वाटिका, सबेसर, बाजहा और पाहो बाजार होते हुए वाराणसी के जखनी, जमुनी स्थित श्रीकृष्ण बैंक्वेट एवं मैरिज लॉन तक पहुंची। रास्ते भर युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और वकीलों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर संजय सिंह का जोरदार स्वागत किया। “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” के नारों के बीच यह पदयात्रा धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेती नजर आई।
वाराणसी (Varanasi) में प्रवेश के साथ ही मणिकर्णिका घाट को लेकर दर्ज एफआईआर का मुद्दा भी सियासी चर्चा के केंद्र में आ गया। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े कथित तोड़फोड़ के विरोध पर कार्रवाई तोड़ने वालों पर नहीं, बल्कि विरोध करने वालों पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित और मोक्ष की मान्यता से जुड़े इस ऐतिहासिक घाट को भाजपा सरकार ने नुकसान पहुंचाया है।
Varanasi: मां गंगा के मंदिर और शिवालय को पहुंची क्षति
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि घाट से जुड़े पौराणिक मंदिरों, मां गंगा के मंदिर, शिवालय और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा (Varanasi) को क्षति पहुंची, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की तानाशाही मानसिकता का उदाहरण बताया।

पदयात्रा (Varanasi) के दौरान संजय सिंह ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार दिलाना और समाज से भेदभाव खत्म करना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों, पिछड़ों, शोषितों और वंचितों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। जातीय भेदभाव, असमानता और भ्रष्टाचार ने गरीबों और युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। उनका कहना था कि “रामराज्य तभी संभव है जब हर हाथ को काम और हर व्यक्ति को समान अवसर मिले।”
वास्तविक भर्तियों के बीच बड़ा अंतर साफ
बेरोज़गारी के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल वादे कर रही है, लेकिन रोजगार देने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के कई विभागों में स्वीकृत पदों और वास्तविक भर्तियों के बीच बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।
संजय सिंह ने सरकार से मांग की कि या तो युवाओं को तत्काल रोजगार दिया जाए, या फिर प्रत्येक बेरोजगार युवा को 10,000 रुपये मासिक बेरोजगारी (Varanasi) भत्ता दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह भत्ता मुफ्त में न देकर, इसके बदले में युवाओं से प्रतिदिन दो घंटे का सरकारी कार्य लिया जा सकता है, ताकि सम्मानजनक ढंग से उन्हें राहत मिल सके।
दलितों और पिछड़ों के मुद्दे पर संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में इनके साथ भेदभाव और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आरक्षण में हेराफेरी और पुलिस थानों में पक्षपात आम हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।

