विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर काशी के छात्रों में जमकर आक्रोश नजर आ रहा है। वाराणसी में छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के प्रावधान वापस नहीं लिए गए या उनमें संशोधन नहीं हुआ, तो यह आंदोलन दिल्ली तक जाएगा।

मार्च ने देखते हुई देखते ले लिया उग्र रूप
जिला मुख्यालय के आसपास सुबह से ही भारी भीड़ जुटने लगी। सवर्ण समाज के युवाओं के नेतृत्व में निकाले गए मार्च ने देखते-ही-देखते उग्र रूप ले लिया। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर UGC के नए नियमों को भेदभाव बताया।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने डीएम कार्यालय का घेराव कर लिया। कलेक्ट्रेट के बाहर मुख्य मार्ग पर प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए। हालात ऐसे बन गए कि जब भी कोई वाहन आता, प्रदर्शनकारी रास्ता रोककर वहीं बैठ जाते। इससे इलाके में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

अधिकारियों को भी लौटना पड़ा वापस
इतना ही नहीं, अफसरों की सरकारी गाड़ियों को रोककर भी जमकर नारेबाजी की गई। हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए, जब ACP पिंडरा और ADCP की गाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने नहीं दिया। कुछ देर तक सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही, जिसके बाद अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान सभी ने योगी-मोदी मुर्दाबाद और हमारी भूल, कमल का फूल जैसे नारों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, हालांकि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों की अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया।

नया UGC नियर सामान्य वर्ग के खिलाफ
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए UGC नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ हैं और इनके दुरुपयोग से झूठे मामलों की संख्या बढ़ सकती है। उनका कहना है कि यह नियम समानता के सिद्धांत के विपरीत हैं और शिक्षा व्यवस्था को जातिवाद की ओर धकेलने की साजिश है।
कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठीं रंजन सिंह ने UGC के संशोधित नियमों को “काला कानून” करार देते हुए प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। वह अपने साथ चूड़ियां लेकर पहुंचीं और कहा कि ये उन सवर्ण व ब्राह्मण नेताओं-अधिकारियों के लिए हैं जो इस कानून के खिलाफ खुलकर आवाज नहीं उठा रहे।
