Varanasi: कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड में फरार चल रहा मुख्य आरोपी बनारसी यादव मंगलवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। घटना चौबेपुर थाना (Varanasi) क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड के पास की है, जहां एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे घेर लिया था। पुलिस के अनुसार, घेराबंदी के दौरान खुद को फंसा देख बनारसी यादव ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही गिर पड़ा। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ स्थल से दो पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि बनारसी यादव कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद से लगातार फरार चल रहा था। इसी वजह से उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी।
Varanasi: तीन शूटरों को दो-दो लाख रुपये और पिस्टल मुहैया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बनारसी यादव गाजीपुर–वाराणसी (Varanasi) हाईवे के रास्ते कहीं भागने की फिराक में है। इसी इनपुट पर चौबेपुर थाना क्षेत्र में चेकिंग लगाई गई थी। इसी दौरान बदमाश से आमना-सामना हुआ और मुठभेड़ हो गई। बनारसी यादव गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट गांव का रहने वाला था। उसके खिलाफ वाराणसी (Varanasi), गाजीपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ पहला मुकदमा वर्ष 2003 में गाजीपुर के खानपुर थाने में दर्ज हुआ था।
गौरतलब है कि 21 अगस्त 2025 को वाराणसी (Varanasi) के सिंहपुर इलाके में बाइक सवार तीन शूटरों ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जांच में सामने आया था कि हत्या की सुपारी संपत्ति विवाद को लेकर दी गई थी। जमीन के एक बड़े विवाद में महेंद्र गौतम के पुराने परिचित जोगेंद्र यादव ने बनारसी यादव को सुपारी दी थी।
इस मामले में अरविंद यादव उर्फ फौजी, जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू, संपूर्णानंद शुक्ला उर्फ चंदन, श्याम राजभर उर्फ रेखा प्रधान और असलहा तस्कर मोहम्मद मुकीम पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि बनारसी यादव की मौत के साथ ही इस हत्याकांड की अहम कड़ी खत्म हो गई है।

