Vishwanath Dham: गंगा के पावन तट पर बसी काशी… जहाँ हर साँस में मंत्रों की ध्वनि है, हर गली में इतिहास की परछाई, और हर सुबह में मोक्ष की आशा। इसी काशी के हृदय में विराजते हैं स्वयं महादेव और उनके 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मंडी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से आस्था, संघर्ष और पुनर्जन्म की अमर कथा है। आइये जानते हैं, पुरानो और इतिहास में क्या है इसकी अद्दभुत गाथा…
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पुराणों के अनुसार, काशी वह नगरी है जिसे स्वयं भगवान शिव ने अपने त्रिशूल पर धारण किया। कहा जाता है कि जब सृष्टि का अंत भी हो जाता है, तब भी काशी अक्षुण्ण रहती है। बाबा विश्वनाथ यानि कि “विश्व के नाथ”। मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।

प्राचीन काल से ही यह स्थल ज्ञान, तप और भक्ति का केंद्र रहा। आदि शंकराचार्य से लेकर संत कबीर और तुलसीदास तक, असंख्य संतों ने यहाँ आकर शिव की महिमा का गुणगान किया।
विध्वंस और पुनर्निर्माण की वेदना
काशी विश्वनाथ (Vishwanath Dham) की कथा जितनी दिव्य है, उतनी ही संघर्षपूर्ण भी। इतिहास के पन्नों में कई बार इस मंदिर को तोड़े जाने की पीड़ा दर्ज है। मध्यकाल में आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को ध्वस्त किया, किंतु हर बार आस्था ने राख से पुनर्जन्म लिया।

इतिहास कहता है कि 17वीं सदी मेंमुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर मंदिर तोड़कर उसके स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया गया। लेकिन आस्था का दीप बुझा नहीं। भक्तों ने समीप ही एक छोटे मंदिर में शिवलिंग की पूजा जारी रखी।
Vishwanath Dham: अहिल्याबाई का पुनर्जागरण
इसके बाद 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य की महान रानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1777-1780 के बीच वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर (Vishwanath Dham) का निर्माण कराया। उनके इस कार्य ने काशी की धड़कन को फिर से जीवित कर दिया। बाद में पंजाब केसरी महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को सोने से मढ़वाया, जिससे यह “स्वर्ण मंदिर” की तरह आभामंडित हो उठा।

संकरे गलियारों से भव्य धाम तक
समय के साथ मंदिर परिसर (Vishwanath Dham) के आसपास बेतरतीब निर्माण हो गया था। श्रद्धालुओं को गंगा घाट से मंदिर तक पहुँचने में अत्यधिक कठिनाई होती थी। संकरी गलियाँ, भीड़ और अव्यवस्था के बीच आस्था का प्रवाह बाधित हो रहा था।

इसी परिस्थिति में 21वीं सदी में एक ऐतिहासिक पहल हुई। वर्ष 2019 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Vishwanath Dham) परियोजना की आधारशिला रखी। उद्देश्य था — गंगा घाट से सीधे मंदिर तक एक भव्य, सुगम और विस्तृत मार्ग तैयार करना।
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर: एक नया अध्याय
दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (Vishwanath Dham) का लोकार्पण हुआ। अब गंगा के ललिता और मणिकर्णिका घाट से श्रद्धालु सीधे विशाल प्रांगण के माध्यम से मंदिर तक पहुँच सकते हैं। लगभग 5 लाख वर्गफुट में फैले इस धाम में चौड़े रास्ते, विशाल प्रांगण, यात्री सुविधाएँ, संग्रहालय और आध्यात्मिक केंद्र बनाए गए हैं।

करीब 300 से अधिक पुराने भवनों को अधिग्रहित कर, उनमें छिपे प्राचीन मंदिरों को खोजकर पुनर्स्थापित किया गया। यह केवल निर्माण नहीं, बल्कि इतिहास की परतों को सहेजने का प्रयास था।
आज जब भक्त धाम के विशाल प्रांगण में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें गंगा की ठंडी हवा और मंदिर के स्वर्णिम शिखर का अद्भुत संगम दिखाई देता है — मानो आस्था और आधुनिकता का आलिंगन हो रहा हो।
महाशिवरात्रि हो या सावन का महीना, काशी विश्वनाथ धाम (Vishwanath Dham) में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक, दिनभर शिव भक्ति की धारा बहती रहती है। “हर हर महादेव” की गूँज गंगा की लहरों से टकराकर पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
यहाँ आने वाला हर व्यक्ति अपने भीतर एक अदृश्य परिवर्तन महसूस करता है। कोई अपने पापों का प्रायश्चित करने आता है, कोई नई शुरुआत की कामना लेकर, तो कोई बस शिव के चरणों में शांति पाने।

