Ramadan 2026: बरकत और रहमत का महीना रमजान चांद के दीदार के साथ शुरू हो गया। बुधवार की शाम विभिन्न मसलकों के उलेमाओं और धर्मगुरुओं ने चांद दिखने की पुष्टि के बाद रमजान मुबारक का एलान किया। बृहस्पतिवार को पहला रोजा रखा गया। इसके साथ ही शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो गया और मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई।

रमजान (Ramadan 2026) का चांद देखने के लिए शाम से ही लोग खानकाहों, दरगाहों और मस्जिदों की छतों के साथ खुले मैदानों में एकत्र होने लगे थे। हालांकि दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के कई हिस्सों में बादल और बारिश के कारण चांद नजर नहीं आया, लेकिन देश के अन्य राज्यों से चांद दिखने की पुष्टि हुई। धर्मगुरुओं ने जानकारी दी कि बिहार के पटना और औरंगाबाद तथा झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में रमजान का चांद देखे जाने की प्रमाणिक सूचना प्राप्त हुई।
Ramadan 2026: सहरी-इफ्तारी का सही टाइमिंग की पूरी लिस्ट

दिल्ली में बादलों की वजह से चांद दिखाई नहीं दिया, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से चांद दिखने की विश्वसनीय जानकारी मिलने के बाद यह तय किया गया कि बृहस्पतिवार से रमजान (Ramadan 2026) का पहला रोजा रखा गया। चांद नजर आने के साथ ही पवित्र महीने का औपचारिक आगाज़ हो जाता है और अगले 29 या 30 दिनों तक मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखकर इबादत में मशगूल रहते हैं।
रमजान केवल रोजा रखने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सब्र और आत्मशुद्धि का महीना है। इस दौरान लोग पांच वक्त की नमाज के साथ तरावीह, कुरआन की तिलावत और दुआओं में विशेष रूप से समय देते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, जकात और सदका देना भी इस महीने की खासियत मानी जाती है।
बाजारों में बढ़ी रौनक, इफ्तार-सहरी की तैयारियां तेज
रमजान (Ramadan 2026) का एलान होते ही वाराणसी के बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। तरावीह की नमाज अदा कर लौटे लोग सीधे बाजारों का रुख करते नजर आए। इफ्तार और सहरी के लिए खरीदारी को लेकर देर रात तक चहल-पहल बनी रही। लोगों ने हलीम, कोरमा, कबाब-पराठा जैसे पकवानों का लुत्फ उठाया, वहीं घरों के लिए दूध, ब्रेड, बन, बटर और बिरयानी के सामान की जमकर खरीदारी की।

पुराने शहर के सैलानी बाजार, कोहाड़पीर और किला बाजार समेत अन्य बाजारों में देर रात तक रौनक देखने को मिली। दुकानदारों के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी, क्योंकि रमजान का महीना व्यापार के लिहाज से भी अहम माना जाता है।
तीन अशरों में मुकम्मल होगा रमजान
इस्लामी परंपरा के अनुसार रमजान का महीना (Ramadan 2026) तीन अशरों में मुकम्मल होता है और हर अशरा दस दिनों का होता है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत (माफी) का और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का माना जाता है। उलेमा बताते हैं कि इस महीने में अल्लाह की खास रहमत बंदों पर बरसती है और नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
इस्लामी मान्यता के मुताबिक रमजान (Ramadan 2026) शुरू होते ही जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। शैतानों को जकड़ दिया जाता है ताकि इंसान पूरी तल्लीनता से इबादत कर सके। कहा जाता है कि पूरे साल जन्नत को रमजान के इस्तकबाल के लिए सजाया जाता है और फरिश्ता एलान करता है—ऐ खैर के तलबगारों, खैर की ओर बढ़ो और ऐ बुराई के चाहने वालों, अब रुक जाओ।

