- दो दर्जन सीटिंग पार्षदों का पत्ता साफ होने की चर्चा ने BJP पार्टी में जोर पकड़ा
- भाजपा व सहयोगी दलों के विधायकों की प्रत्याशियों के चयन में खूब चली
- कांग्रेस के कई नाम ऐसे हैं, जिनको भाजपा से टिकट मिलना तय माना जा रहा
जितेंद्र श्रीवास्तव
वाराणसी। निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। हर राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर निकाय चुनाव में अपना सिक्का जमाने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। पार्षदी की बात हो या फिर मेयर, चेयरमैनी की। इसके लिए प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया भी तेज हो चुकी है। कांग्रेस ने तो महापौर पद पर प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। जबकि भाजपा समेत अन्य राजनीति एक-दूसरे की चाल पर पैनी नजर रखे हुए हैं। लेकिन हम यहां बात करने जा रहे हैं सत्ताधारी दल भाजपा के सिंबल पर पार्षदी पद का चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशियों के बारे में। ऐसे प्रत्याशियों के दिन और रात की चैन हराम हो गयी है। पार्षदी पद के लिए आवेदन करने वाले कार्यकर्ता इन दिनों खासे बेचैन है। इनके बारे में यह बात काफी सटीक बैठती है-…काटे नहीं कटते दिन और रात।
पार्टी सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी और सीएम योगी के जादू के चलते भाजपा से पार्षदी का चुनाव लड़ने वालों की ख्वाहिश काफी बढ़ गयी है। पार्षदी के लिए दावेदारी करने वाले ऐसे लोग अपने-अपने आकाओं के सम्पर्क में लगातार हैं और अपने पक्ष में टिकट पक्का करने के लिए हर तिकड़म आजमा रहे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो दो दर्जन सीटिंग पार्षदों का पत्ता साफ होना तय माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ऐसे पार्षदों के क्रियाकलापों से खासे नाराज है। वजह, मौजूदा जिन पार्षदों का टिकट कटेगा, उनके बारे में उनके क्षेत्र के विधायकों ने नाराजगी जाहिर की है। इस बात को इससे और बल मिलता है कि पार्षदी पद के लिए संभावित प्रत्याशियों के चयन में पार्टी के विधायकों की खूब चली है। इतना ही नहीं, नगरीय क्षेत्र के बाहर के विधायकों का भी काम आया है।
कहने का आशय यह कि नगरीय क्षेत्र के साथ-साथ गैर नगरीय क्षेत्र के विधायकों ने भी पार्षदी पद के प्रत्याशियों के चयन में महती भूमिका अदा किया है। वजह साफ है कि तमाम गांव नगरीय सीमा में शामिल किए गए हैं और इन गांवों में भी पार्षदी पद का चुनाव होगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन मौजूदा पार्षदों के टिकट कटे हैं, वह निर्दल या गैर भाजपा दल के सिंबल पर निकाय चुनाव में प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने को कमर कस चुके हैं। इतना ही नहीं, सूत्र यह भी बताते हैं कि कांग्रेस के मौजूदा कई सक्रिय कार्यकर्ता ऐसे हैं, जिन्होंने फिलहाल भाजपा का दामन तो नहीं थामा है, लेकिन उनको भाजपा का टिकट मिलना तय माना जा रहा है। उदाहरण के तौर पर जोल्हा उत्तरी वार्ड से कांग्रेस के एक दिग्गज नेता के पुत्र को भाजपा ने टिकट देने का पूरा मन बना लिया है। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो सूची जारी होने के बाद ही सामने आ सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्षदी के लिए दावेदारी करने वालों में लोगों के नाम की सूची लखनऊ मुख्यालय पहुंच चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में पार्षदी के लिए टिकट फाइनल किया जाएगा। इसके लिए बकायदे कमेटी बनाई गई है। प्रदेश नेतृत्व की मुहर लगने पर ही पार्षद पद के लिए प्रत्याशियों का नाम घोषित होगा। अब देखना यह है कि पार्टी का सिंबल किस दावेदार के हाथ लगता है। पार्टी सूत्रों की मानें तो शुक्रवार या शनिवार तक पार्षद पद के प्रत्याशियों की सूची प्रदेश नेतृत्व जारी कर सकता है।
टिकट हथियाने के लिए शिकायत भी कर रहे दावेदार
नगर निकाय चुनाव में भाजपा से टिकट पाने के लिए वार्डों से दावेदारी करने वालों में घमासान तेज हो गया है। जिन लोगों के नाम पैनल में भेजे गए हैं, वे टिकट पक्का करने के चक्कर में एक-दूसरे की शिकायत करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पैनल में भेजे गए दावेदार एक-दूसरे की शिकायत पार्टी के बड़े पदाधिकारियों से कर रहे हैं ताकि उनका टिकट पक्का हो जाए। पार्टी सूत्रों की माने तो कार्यालय के चक्कर लगाने वालों की संख्या बढ़ गई हैं। हर कोई अपनी गोटी सेट करने में लगा है। उधर, कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी अपने-अपने चहेतों को टिकट दिलाने का आश्वासन भी दे रहे हैं। नगर निगम के 100 वार्ड और नगर पंचायत गंगापुर के 10 वार्डों के लिए सूची का इंतजार सभी दावेदार कर रहे हैं। हालांकि प्रत्याशियों के चयन पर मंथन भी हो चुका है। बस कागजी कोरम पूरा करने के साथ प्रदेश कार्यालय की ओर से इसकी घोषणा करना बाकी है।

