माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ से पूर्व विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मऊ से मिली दो साल की सजा और जुर्माने को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अब उनकी विधायकी बहाल हो जाएगी।
जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था और बुधवार को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया।
Abbas Ansari: क्या था मामला?
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) ने एक चुनावी सभा में प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। 3 मार्च 2022 को दिए गए उनके इस बयान में उन्होंने मंच से अधिकारियों को “चुनाव बाद हिसाब करने” की बात कही थी। इस बयान को चुनाव आयोग ने संज्ञान में लिया और 4 मार्च को उनके खिलाफ हेट स्पीच का मुकदमा दर्ज कराया गया।
इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट मऊ ने 31 मई 2025 को अब्बास को दो साल की कैद और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके आधार पर 1 जून 2025 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई थी।
अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) ने इस फैसले के खिलाफ जिला जज मऊ की अदालत में अपील की थी, लेकिन 5 जुलाई को वह खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत मांगी।
हाईकोर्ट में सुनवाई
अब्बास की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा और अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी ने दलीलें पेश करते हुए निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने का विरोध किया।
हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया और अब्बास (Abbas Ansari) को बड़ी राहत देते हुए उनकी सदस्यता बहाल करने का मार्ग साफ कर दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मऊ विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव नहीं होगा। हालांकि, राज्य सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।