Varanasi: की अदालत में सोमवार को वह दृश्य देखने को मिला जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए। बहुचर्चित कफ सिरप कांड का आरोपी राहुल यादव, जिसे पकड़ने के लिए महीनों से पुलिस दबिश दे रही थी, अचानक जिला कोर्ट में वकीलों के चेंबर पहुंचा और सरेंडर कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि सैकड़ों पुलिसकर्मी (Varanasi) मौजूद होने के बावजूद आरोपी बिना किसी रोक-टोक के अदालत तक पहुंच गया।
पुलिस सुरक्षा घेरे की पोल
जिला कोर्ट परिसर में तैनात इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों की मौजूदगी के बावजूद राहुल यादव ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। वकीलों के चेंबर में दाखिल होते ही पुलिसकर्मी (Varanasi) मूकदर्शक बने रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने यह चर्चा तेज कर दी कि कहीं पुलिस की मिलीभगत से ही आरोपी को सरेंडर कराने का रास्ता तो नहीं बनाया गया।
वकीलों के जरिए समर्पण
राहुल यादव ने अधिवक्ताओं अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव और संदीप यादव के माध्यम से अदालत (Varanasi) में समर्पण याचिका दायर की। पुलिस को इसकी जानकारी पहले से थी, लेकिन गिरफ्तारी का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। अदालत में पेशी के दौरान आरोपी ने खुद को नामजद मानते हुए अपनी भूमिका से इनकार किया और पुलिस पर उत्पीड़न व धमकी देने का आरोप लगाया।
Varanasi अदालत का रुख
विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट/14वां वित्त फाइनेंस) की अदालत ने वकीलों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। हालांकि उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं की गई। इस फैसले ने साफ कर दिया कि अदालत मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी तरह की राहत देने के मूड में नहीं है।
कफ सिरप कांड की पृष्ठभूमि
15 नवंबर 2025 को औषधि निरीक्षक जुनाब अली ने कोतवाली थाने में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का मामला दर्ज कराया था। इस कांड का सरगना शुभम जायसवाल बताया गया, जिसके साथ राहुल यादव समेत कई अन्य आरोपी नामजद किए गए। आरोप है कि इन लोगों ने विभिन्न जनपदों के 28 लोगों के साथ मिलकर तस्करी का जाल फैलाया, जिससे कई लोगों की जान जा चुकी है।
पुलिस की नाकामी और सवाल
दो जनवरी 2026 को सभी आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। इसके बाद पुलिस लगातार दबिश देती रही, लेकिन राहुल यादव का कोई सुराग नहीं मिला। अंततः उसने पुलिस को चकमा देकर अपने वकीलों के जरिए अदालत में सरेंडर कर दिया। यह घटनाक्रम पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वाराणसी का यह सरेंडर न केवल कफ सिरप कांड की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी गहरी छाया डालता है। आरोपी का अदालत तक पहुंचना और पुलिस का मूकदर्शक बने रहना, कानून-व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चोट है। अब देखना होगा कि न्यायालय इस पूरे मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और क्या पुलिस अपनी छवि बचा पाएगी।

