Varanasi: काशी के 14 मंदिरों से साईं बाबा की मूर्ति हटाने वाले सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा कोर्ट से जमानत के बाद बुधवार सुबह रिहा कर दिए गए। उनके खिलाफ चौक व सिगरा थाने में धार्मिक भावनाओं को भड़काने, धार्मिक स्थलों पर तोड़-फोड़ करने जैसे गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। जिसके तहत पुलिस ने उन्हें बीते 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, इसके बाद मंगलवार को स्पेशल CJM कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। शाम को उनकी रिहाई का आदेश जेल भेजा गया, जिसके बाद बुधवार सुबह चौकाघाट जिला जेल से उन्हें रिहा कर दिया गया।
Varanasi: पुलिस ने दी थी रिमांड की अर्जी
अजय शर्मा को 3 अक्टूबर को चौक थाने में दर्ज मामले के आधार पर वाराणसी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सोमवार को जिला जज ने उनकी अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई की थी, लेकिन अगली तारीख 18 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। मंगलवार को पुलिस ने रिमांड की अर्जी दी थी, जिसपर स्पेशल CJM कोर्ट में सुनवाई हुई थी।

बिना नोटिस के पुलिस रिमांड नहीं ले सकती: वकील
मंगलवार को कोर्ट में अजय शर्मा के वकील विवेक शंकर तिवारी ने तीखी बहस की। उन्होंने पुलिस की रिमांड अर्जी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 7 साल की सजा वाले मामलों में पुलिस बिना नोटिस के रिमांड नहीं ले सकती, जबकि पुलिस ने सीधे रिमांड के लिए अर्जी दी थी। वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने नोटिस नहीं दी थी, और पुरानी सीआरपीसी की धारा 41(a) की तरह अब बीएनएस की धारा 35(3) की नोटिस होती है।

वकील विवेक शंकर तिवारी ने बताया कि उन्होंने अजय शर्मा की जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया था, जिसके तहत कोर्ट ने 25-25 हजार की दो जमानत पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। रिहाई का आदेश शाम को जेल भेजा गया और बुधवार की सुबह अजय शर्मा को जेल से रिहा कर दिया गया।

