प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप (Cough Syrup) का कारोबार अब केवल नशे का धंधा नहीं रहा, बल्कि यह अपराध और राजनीति के खतरनाक गठजोड़ का प्रतीक बन चुका है। जौनपुर और वाराणसी से जुड़े इस मामले ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
42 करोड़ का अवैध कारोबार
औषधि निरीक्षक की रिपोर्ट ने खुलासा किया कि 12 फर्मों के नाम पर प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई की गई, जिसका अवैध कारोबार करीब 42.5 करोड़ रुपये तक पहुंचा। यह नशीली दवाइयां न केवल देश के अलग-अलग हिस्सों में, बल्कि विदेशों तक भेजी गईं। मामला सामने आते ही जौनपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ और एसपी डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई।
एसआईटी की गहन पड़ताल
आएसआईटी अब इस मामले की परत दर परत जांच कर रही है। करीब 20 खातों से जुड़े 600 पन्नों के बैंक स्टेटमेंट खंगाले जा रहे हैं। शुभम जायसवाल की फर्म ‘शैली ट्रेडर्स’ से लेकर उन खातों तक की जांच हो रही है, जिनमें पैसे भेजे या प्राप्त किए गए। रांची तक टीमें (Cough Syrup) भेजी गई हैं ताकि नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सके। सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और नाम उजागर होंगे और छापेमारी का दायरा बढ़ेगा।
Cough Syrup: अमित ‘टाटा’ पर शिकंजा
लखनऊ से गिरफ्तार किए गए अमित सिंह ‘टाटा’ पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। सुरेरी थाने की पुलिस ने उसके सीठूपुर स्थित पैतृक घर पर छापा मारा। गहन तलाशी के दौरान परिवार से पूछताछ हुई, हालांकि कोई बड़ा सबूत हाथ नहीं लगा। टाटा का परिवार वाराणसी में रहता है और वह पंचायत चुनाव में ब्लॉक प्रमुख पद के लिए प्रचार कर रहा था। उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और बाहुबली सांसद रहे धनंजय सिंह से करीबी ने इस मामले (Cough Syrup) को और संवेदनशील बना दिया है।
नेटवर्क पर निगरानी
जांच एजेंसियां अब अमित टाटा से जुड़े हर ठिकाने पर नजर रख रही हैं। उसके कारोबारी और राजनीतिक नेटवर्क की गहन पड़ताल हो रही है। गांव में दबिश की खबर फैलते ही भीड़ जुट गई, लेकिन पुलिस (Cough Syrup) ने किसी को घर के भीतर नहीं जाने दिया। एहतियातन इलाके में गश्त भी बढ़ा दी गई है।
इस मामले ने राजनीति की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने यूपी डीजीपी को पत्र लिखकर जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अमित टाटा के पीछे धनंजय सिंह का संरक्षण हो सकता है, जिसकी गहन जांच जरूरी है।
बता दें, “मौत का सिरप” केवल एक अवैध कारोबार नहीं, बल्कि उस तंत्र का आईना है जिसमें अपराध, राजनीति और धन का गठजोड़ समाज को जहर की तरह खोखला कर रहा है। एसआईटी की जांच से यह साफ है कि मामला केवल कुछ फर्मों (Cough Syrup) तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क है। सवाल यह है कि क्या कानून इस बार अपराध और सत्ता के इस गठजोड़ को पूरी तरह तोड़ पाएगा, या फिर यह कहानी भी अधूरी रह जाएगी।

