- आकृति की खोज प्रतियोगिता में 500 प्रतिभागियों ने की सहभागिता
- देश के कई राज्यों से पधारे कलाकारों की कला दक्षता देखने को मिली
- कलाकारों को प्रथम 3000, 2000 हजार का दो द्वितीय व 1000 का तृतीय पुरस्कार दिया गया
- एक-एक हजार रुपये के 30 नगद पुरस्कार भी दिये गये
- राम छाटपार शिल्पन्यास का रोमांचक आयोजन
राधेश्याम कमल
वाराणसी। गुरु राम छाटपार के 78वें जन्म दिवस पर गुरुवार को राम छाटपार शिल्पन्यास भारत मां गंगा की रेत पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलाकारों ने रविदास घाट के ठीक सामने गंगा पार रेती पर कई आकृतियों को साकार किया। प्रतियोगिता में लगभग 500 प्रतिभागियों ने रेत पर नवीन प्रयोगात्मक व स्वतंत्र मूर्ति शिल्प की रचना की जो अपने आप में रोमांचक एवं चुनौतीपूर्ण था। इस कार्यक्रम में स्थानीय एवं देश के अन्य राज्यों से पधारे कलाकारों की कला दक्षता को सृजित करने एवं प्रदर्शित होने का अदभुत अवसर देखने को प्राप्त हुआ। विभिन्न वर्गों के कलाकार पूरी तन्मयता से अपनी कलाकृति के प्रति समर्पित रहे।

राम छाटपार शिल्पन्यास’ की स्थापना 1989 में गुरू राम छाटपार (आधुनिक मूर्तिशिल्पी) की स्मृति में उनके छात्रों मित्रों के सहयोग से हुआ। कार्यकम के मुख्य अथिति लियाकत अली आफाकी अपर आयुक्त वाराणसी ने 1000 /1000 हजार रूपया के 30 पुरस्कारों तथा सर्टिफिकेट का वितरण किया। इसके अतिरिक्त मुख अतिथि ने अपनी ओर से 3000 रुपए का एक प्रथम पुरस्कार पीजी कॉलेज की छात्राओं के द्वारा निर्मित कलाकृति कंडीशन आफ वुमेंस आफ इंडिया को दिया । 2000 /2000 रुपये के दो द्वितीय पुरस्कार पहला 1- डॉ. विभूति नारायण सिंह परिसर गंगापुर के छात्रों की निर्मित कलाकृति काशी नगरी एवम रिपु आर्ट क्लासेज की निर्मित कलाकृति काझा वाला कांड कला कृति को दिया गया। 1000 हजार रुपये के तृतीय पुरस्कार एनटीपीसी परिसर शक्ति नगर के छात्रों द्वारा निमित 75 अमृत महोत्सव को प्रदान कर छात्र कलाकारों का उत्साहवर्धन किया । कार्यक्रम संयोजक मदन लाल गुप्ता, संस्थापक, मो. राम छाटपार शिल्प न्यास रहे।

शिल्पन्यास जल्द ही एक “अन्तर्राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय” बनायेगा
कार्यक्रम संयोजक मदन लाल गुप्ता ने बताया कि न्यास के प्रथम अध्यक्ष पदमश्री स्व. प्रो शखो चौधुरी (वरिष्ठ मूर्तिकार) थे। गुरु राम छाटपार के कला में समर्पण की भावना से प्रेरित होकर यह संस्था आधुनिक एवं समकालीन मूर्तिकला के क्षेत्र के विकास में नवीन प्रयोगों को लेकर समर्पित है। पिछले 30 वर्षों से राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों को आयोजित करते हुए यह संस्था अच्छी खासी ख्याति प्राप्त कर रही है। शिल्पन्यास जल्द ही एक “अन्तर्राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय” की कार्य योजना में समर्पित है। रेत पर आकृति की खोज में विषेष रूप से काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला के छात्रों एवं गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद आदि के अलावा देश के विभिन्न ललित कला के छात्रों तथा शहर के कला प्रेमियों की भागीदारी हुई।

पिछले 20 वर्षों से इनका अथक परिश्रम एवं सहयोग वाराणसी बहर के कला-विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहा है। भारतवर्ष का यह इकलौता कार्यक्रम अपने आप में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का अनूठा कार्यक्रम है। गुरु राम छाटपार के जन्मदिवस पर मनायी जाने वाली रेत में आकृति की खोज कार्यक्रम के आधार पर गंगा नदी के अन्य तटवर्ती शहरों में भी पिछले कुछ वर्षो से इस प्रकार का आयोजन शुरू किया गया जो कला को सुदृढ़ करने का एक अच्छा जरिया है। मानवीय संवेदनाओं की सुन्दरतम अभिव्यक्ति ही कला है। जब कलाकार उसे अपने अंगुलियों के स्पर्श से स्पन्दित करता है तो वह एक तरह की अनमोल कलाकृति का रूप ग्रहण कर लेता है। जहाँ पर दर्शक भी आनन्द की अनुभूति से ओत-प्रोत हो जाता है, और वाह-वाह कह उठता है। माँ गंगा के तट पर अनवरत विस्तृत जल के साथ कही- कहीं निकले बालू के टीले पर जब उत्कृष्ट कलाकृतियों का समागम होता है तो दर्शक एवं कलाकार भी कला-आनन्द से आल्हादित एवं स्पन्दित हो उठता है। इसी कार्यक्रम के द्वारा कला का समाज के साथ एवं समाज का कला के साथ एक अनूठा संगम होता है जो जीवन के अर्था को पूरा करता है।

घटनाक्रमों को प्रदर्शित करने का कोरा कैनवास है रेत पर आकृत्ति
आयोजन से जुड़े संजय गुप्ता ने बताया कि रेत के इस वार्षिक आयोजन में सभी कलाकारों के लिए रेत का विस्तृत पटल वर्ष भर के सामाजिक, राजनितिक घटनाक्रमों एवं अच्छाइयों बुराइयों को प्रदर्शित करने का कोरा कैनवास सा होता है जिस पर सभी कलाकार रेत के माध्यम: से इन घटनाक्रमों को अपने तरीके से व्यक्त करते हैं। इस बार भी एक-एक हजार रुपये के 30 नगद पुरस्कार “राम छाटपार शिल्पन्यास” द्वारा प्रदान किया गया। शहर के कलानुरागियो, साहित्यकारों, प्रतिष्ठित लोगों की भागीदारी भी हमेशा की तरह लोगों का उत्साह वर्धन किया।