वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। हिन्दी विभाग की एक ईडब्ल्यूएस श्रेणी की छात्रा ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना शुरू कर दिया। छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे नियमपूर्वक प्रवेश मिलने के बावजूद जानबूझकर वंचित किया जा रहा है, जबकि एक “राजनीतिक पृष्ठभूमि” वाले छात्र को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
छात्रा के आंदोलन को देखते हुए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मौके पर पुलिस के साथ-साथ पीएसी की तैनाती भी की गई है। इसी बीच करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रा को अपना समर्थन दिया।

BHU:प्रमाण पत्र के बावजूद नहीं मिला प्रवेश
धरने पर बैठी छात्रा अर्चिता सिंह ने बताया कि हिन्दी विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के तहत उसने सभी दस्तावेज समय से जमा कर दिए थे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का प्रमाण पत्र पिछली वर्ष की तिथि का था, जिसे अद्यतन करने के लिए उसने एक शपथ पत्र के माध्यम से 31 मार्च तक नया प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की बात कही थी।
छात्रा का दावा है कि उसने 29 मार्च को ही नया प्रमाण पत्र विभाग को ईमेल और हार्डकॉपी के माध्यम से जमा करा दिया था। इसके बावजूद प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर होने के बावजूद उसे प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि राजनीतिक संपर्कों वाले एक छात्र को आगे बढ़ाने की तैयारी की गई।

प्रशासनिक टालमटोल का आरोप
छात्रा का कहना है कि पिछले 15 दिनों से वह विश्वविद्यालय के चक्कर काट रही है, लेकिन कुलपति, कुलसचिव या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हिन्दी विभाग के अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक द्वारा उसे समझाने की कोशिश की गई, लेकिन जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो उसने धरना शुरू कर दिया।
छात्रा ने यह भी बताया कि विभाग ने शपथ पत्र को अस्वीकार करते हुए कहा कि इस प्रकार का कोई नियम नहीं है, जबकि पूर्व में कई छात्रों को इसी प्रक्रिया के तहत प्रमाण पत्र जमा करने की अनुमति दी गई थी। अब उसका मामला प्रवेश समन्वय समिति के पास भेज दिया गया है।
प्रशासन पर पक्षपात का आरोप, शिकायतें उच्च स्तर तक
छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवेश में पारदर्शिता के बजाय पक्षपात और सिफारिश को प्राथमिकता दी जा रही है। उसने अपनी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय महिला आयोग और प्रधानमंत्री के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय तक भी भेज दी है। छात्रा का स्पष्ट कहना है कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, वह धरना समाप्त नहीं करेगी।
Highlights
करणी सेना ने दिया समर्थन
देरशाम छात्रा के समर्थन में उसके कुछ सहपाठी और अन्य छात्र भी धरना स्थल पर पहुंच गए। अब करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन की घोषणा के बाद मामला और गर्मा गया है।