मऊ जिले में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर शुक्रवार की शाम blackout mock drill का आयोजन किया गया। जैसे ही चेतावनी सायरन बजा, वैसे ही पूरे शहर की लाइटें बंद हो गईं। घरों, दुकानों और सड़कों पर रोशनी के सभी वैकल्पिक साधन भी आम लोगों ने स्वयं बंद कर दिए, जिससे कुछ ही पलों में पूरा शहर अंधेरे में डूब गया।
blackout mock drill का मुख्य कार्यक्रम जीवन राम छात्रावास मैदान, सोनी धापा बालिका इंटर कॉलेज के पास आयोजित किया गया। मॉकड्रिल के दौरान हवाई हमले की स्थिति को दर्शाते हुए आग लगने की घटनाओं का अभ्यास किया गया। अग्निशमन विभाग की बड़ी गाड़ियों के साथ-साथ छोटे अग्निशमन सिलेंडरों की मदद से मकानों में लगी आग को बुझाने का प्रदर्शन किया गया।

blackout mock drill: घायलों के राहत और बचाव का अभ्यास
इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मी, आपदा मित्र, एनसीसी, एनएसएस, नागरिक सुरक्षा कोर और नेहरू युवा केंद्र के वॉलिंटियर्स ने घायलों के राहत और बचाव का अभ्यास किया। प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई, गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया दिखाई गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शेल्टर होम तक ले जाने का अभ्यास भी कराया गया। मॉकड्रिल (blackout mock drill) के दौरान वॉलिंटियर्स ने आम नागरिकों को हवाई हमले की स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसकी भी जानकारी दी। ऊंची और लंबी सायरन के बाद ब्लैकआउट मॉकड्रिल (blackout mock drill) की कार्रवाई संपन्न हुई।

इस मॉकड्रिल में विद्युत विभाग, नगर विकास, स्वास्थ्य, अग्निशमन सहित आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों ने हिस्सा लिया। आयोजन नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से किया गया।


अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि ब्लैकआउट मॉकड्रिल का उद्देश्य लोगों को संभावित हवाई हमलों के दौरान बचाव के तरीकों से अवगत कराना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक न सिर्फ अपनी जान बचा सकें, बल्कि दूसरों की भी मदद कर सकें।

