Chitarghanta Temple: शारदीय नवरात्र में नव दुर्गा के दर्शन-पूजन करने के क्रम में तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने चौक स्थित मां चित्रघंटा देवी का दर्शन-पूजन कर आशीष मांगा। मां भगवती का दर्शन-पूजन करने के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी हो गया था। भक्तों ने मां चित्रघंटा को नारियल, चुनरी, अड़हुल की माला अर्पित कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर से लेकर सड़क तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें [Chitarghanta] लगी थी। संकरी गली होने के नाते श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मंदिर के बाहर सड़क पर नारियल, चुनरी, अड़हुल की माला की अस्थायी दुकानें लगी थी जहां पर लोगों ने खरीदारी की। इस दौरान मंदिर के पास व गलियों में पुलिस फोर्स के जवानों की ड्यूटी लगायी गई थी। इनमें महिला पुलिस कर्मी भी शामिल थीं। सायंकाल मां का विशेष शृंगार किया गया।

सुबह से रात तक भक्तों ने मां Chitarghanta के किए दर्शन
दर्शन का सिलसिला सुबह से लेकर रात्रि तक चलता रहा। चन्द्रघंटा देवी [Chitarghanta] के ध्यान व मंत्र के जप से साधक में अद्भुत शक्ति व मन में निर्मलता की प्राप्ति होती है। मनुष्य भय से मुक्त होकर शक्ति प्राप्त करता है। देवी के इस स्वरूप के पूजन से व्यक्ति समस्त संकटों से मुक्त हो जाता है।
पंचम स्कंदमातेति
भगवती के नौ विविध स्वरूपों में पांचवां स्थान स्कंदमाता को प्राप्त है। शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि को इन्हीं के दर्शन-पूजन का विधान है। इस बार इनका दर्शन 19 अक्टूबर गुरुवार को होगा। स्कंदमाता का विग्रह जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी का मंदिर परिसर में है। छांदोम्य श्रुति के अनुसार भगवती की शक्ति से उत्पन्न हुए सनत कुमार का नाम स्कंद है। उनकी माता होने से देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा।
यदि साधक नियमित रूप से देवी की आराधना लगन व निष्ठा के साथ करता है तो वह दैविक, दैहिक व भौतिक संकटों से मुक्त हो जाता है। स्कंद माता व्यक्ति को सोचने व समझने की शक्ति प्रदान करने वाली देवी हैं। इनकी पूजा ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों देवों सहित यक्ष, किन्नरों व दैत्यों ने भी की। उनमें मातृत्व का भाव है।