Cough Syrup तस्करी से कमाए गए काले धन को सफेद करने का एक सुनियोजित और संगठित खेल सामने आया है, जिसमें हवाला, शराब कारोबार और ‘नामधारी’ लाइसेंस का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं तो कहानी सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें परिवार, रिश्तेदार और कारोबारी गठजोड़ की गहरी साजिश सामने आई। पुलिस की कार्रवाई में पांच महिलाओं की गिरफ्तारी ने इस काले खेल की दिशा और गहराई दोनों को उजागर कर दिया, हालांकि साक्ष्यों की कमी ने कानून की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया।
गिरफ्तारी और रिहाई: कार्रवाई पर साक्ष्यों का साया
कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को हवाला कारोबारी वैभव जायसवाल की मां, पत्नी समेत पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया। आरोप था कि ये महिलाएं कफ सिरप तस्करी (Cough Syrup) से अर्जित ब्लैक मनी को व्हाइट करने के नेटवर्क का हिस्सा थीं। लेकिन अदालत में पर्याप्त साक्ष्य पेश न किए जा पाने के कारण न्यायिक रिमांड देने से इन्कार कर दिया गया और सभी महिलाओं को रिहा कर दिया गया। यह घटनाक्रम पुलिस की कार्रवाई और साक्ष्य जुटाने की चुनौती दोनों को सामने लाता है।
जांच में सामने आया कि शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर और सोनभद्र जेल में बंद भोला प्रसाद जायसवाल ने लॉटरी सिस्टम के जरिए महिलाओं के नाम पर शराब ठेकों के लाइसेंस हासिल किए। इन नामों में वैभव जायसवाल की मां राधिका और पत्नी शिवांगी के अलावा अन्य महिलाएं भी शामिल थीं। यह पूरा तंत्र इस तरह तैयार किया गया कि काले धन को वैध कारोबार के जरिए सफेद किया जा सके और असली संचालक पर्दे के पीछे रहें।
Cough Syrup: गिरफ्तारी के बाद खुली परतें
एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह के अनुसार, नवापुरा निवासी राधिका जायसवाल और शिवांगी जायसवाल के अलावा राजघाट भारद्वाजी टोला की ऊषा देवी, कायस्थ टोला की रेखा देवी और बबिता सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था। पिछले सप्ताह भगोड़े शुभम के करीबी वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस ने हवाला नेटवर्क (Cough Syrup) को खंगालना शुरू किया, जिसमें यह पूरा जाल सामने आया।
जांच में यह भी सामने आया कि कफ सिरप तस्कर (Cough Syrup) सरगना शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल ने तस्करी से अर्जित ब्लैक मनी को शराब कारोबार में निवेश कर सफेद किया। भोला प्रसाद ने लॉटरी सिस्टम से महिलाओं के नाम पर अंग्रेजी शराब की दुकानें लीं, जबकि वैभव इन दुकानों से होने वाली आय को हवाला के जरिए शुभम तक पहुंचाता था। यह एक सुनियोजित आर्थिक तंत्र था, जिसमें हर कड़ी अपनी भूमिका निभा रही थी।
पूछताछ में खुलासा: अवैध कमाई का वैध चेहरा
महिला आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे अंग्रेजी शराब की दुकानों की अनुज्ञापी हैं, लेकिन असल में इन दुकानों में लगाया गया पैसा कफ सिरप तस्करी से अर्जित अवैध कमाई थी। शुभम और भोला प्रसाद ने इस धन को वैध बनाने के लिए पूरा निवेश किया था, जिससे काले धन को कानूनी आय के रूप में दिखाया जा सके।
कोतवाली पुलिस और एसआईटी की जांच में बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेजों से यह साफ हुआ कि भगोड़े शुभम जायसवाल को फरारी के दौरान भी हवाला के जरिए लगातार आर्थिक सहायता मिलती रही। एक एओपी के माध्यम से उसने छह अंग्रेजी शराब दुकानों से मिलने वाले लाभांश में अपना हिस्सा तय कर रखा था। यह नेटवर्क (Cough Syrup) सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें साड़ी और होटल कारोबार से जुड़े लोग भी शामिल थे।
जांच में यह भी सामने आया कि चौकाघाट निवासी एक शराब कारोबारी ने शुभम और अन्य व्यापारियों को अपने सिंडिकेट में शामिल कर अंग्रेजी शराब के ठेके उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं, कफ सिरप मामले (Cough Syrup) में जेल में बंद आरोपियों के परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर देसी और कंपोजिट शराब दुकानें भी ली गईं, जिससे पूरा नेटवर्क एक मजबूत आर्थिक ढांचे में बदल गया।
अदालत में पेशी टली: जांच के लिए अहम कड़ी
इस बीच, कफ सिरप मामले (Cough Syrup) में लखनऊ जेल में बंद अमित सिंह टाटा और अमित यादव की पेशी मंगलवार को नहीं हो सकी, जबकि उन्हें सात अप्रैल को अदालत में पेश किया जाना था। कोतवाली थाना प्रभारी दयाशंकर सिंह के अनुसार, पेशी के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया है। पुलिस का मानना है कि इन दोनों से पूछताछ में तस्करी नेटवर्क, सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
यह पूरा मामला सिर्फ कफ सिरप तस्करी (Cough Syrup) का नहीं, बल्कि एक ऐसे संगठित आर्थिक अपराध का है, जिसमें हवाला, फर्जी लाइसेंस और रिश्तों के नाम पर खड़ा किया गया नेटवर्क शामिल है। पुलिस की कार्रवाई ने इसकी कई परतें जरूर खोली हैं, लेकिन साक्ष्यों की कमी और कानूनी प्रक्रिया की जटिलता इस लड़ाई को लंबा और कठिन बनाती है। साफ है कि काले धन को सफेद करने का यह खेल जितना सुनियोजित है, उसे बेनकाब करना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण।




