महादेव की नगरी काशी जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) की रात पूरी तरह से कृष्णमय हो उठी। आधी रात जैसे ही नंदलाल के जन्म की घोषणा हुई, मंदिरों और घरों में “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के स्वर गूंज उठे। सोहर गीतों, भजनों और बधाइयों पर भक्त नाचते-झूमते नजर आए।
दुर्गाकुंड स्थित श्रीकृष्ण इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व इस बार बेहद भव्य रहा। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजे मंदिर में जयकारों की गूंज लगातार सुनाई देती रही। इस दो दिवसीय जन्मोत्सव की तैयारियां कई दिन पहले से चल रही थीं, जिसमें पुजारी और भक्त उत्साह के साथ जुटे रहे।

मंदिर में लगा रहा भक्तों का तांता
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भजन-कीर्तन का दौर पूरे दिन चलता रहा। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भीड़ उमड़ी। रातभर मंदिर के पट खुले रहे ताकि भक्त निर्बाध दर्शन कर सकें। इस अवसर पर शुद्ध घी से बने सैकड़ों किलो हलवे का प्रसाद वितरित किया गया।

जन्मोत्सव (Krishna Janmashtami) के दौरान इस्कॉन मंदिर में भक्ति और संस्कृति का संगम दिखाई दिया। प्रसिद्ध विसुद्ध बैंड (IIT BHU के पूर्व छात्र) ने हरे कृष्ण कीर्तन प्रस्तुत कर भक्तों को भावविभोर कर दिया। वहीं वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुतियां देकर माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।
Krishna Janmashtami पर लीलाओं का जिवंत चित्रण
भक्तों को इस अवसर पर भगवान को झूला झुलाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। मंच पर श्रीकृष्ण (Krishna Janmashtami) की लीलाओं का जीवंत चित्रण किया गया। एलईडी प्रस्तुति के माध्यम से ध्वनि और प्रकाश का ऐसा संयोजन किया गया जिसने दर्शकों को वृंदावन की लीलाओं का सजीव अनुभव कराया।

इस बार भगवान श्रीकृष्ण को पहनाए गए वस्त्र वृंदावन से विशेष रूप से मंगवाए गए थे। लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में लगभग दो किलोमीटर लंबी कतार लगी रही।
रात 12 बजे हुआ नन्द के लाल का जन्म
रात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान के जन्म की घोषणा हुई, वातावरण जयकारों से गूंज उठा। भक्तों की आंखों में भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा और हर कोई कृष्ण जन्म की इस अनूठी घड़ी को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण मान रहा था।