BHU ट्रॉमा सेंटर में शनिवार को उस समय हंगामा मच गया जब इलाज कराने आए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बाउंसरों ने बेरहमी से पिटाई कर दी। पीड़ित का आरोप है कि वह अपने पिता को हड्डी रोग विभाग में दिखाने पहुंचे थे, तभी ओपीडी में तैनात बाउंसर से मरीज के नंबर के बारे में पूछना भारी पड़ गया। बाउंसर ने न सिर्फ गाली-गलौज की, बल्कि अपने साथियों को बुलाकर कमरे में बंद कर लात-घूंसों से मारपीट भी की।
BHU: क्या है पूरा मामला
चंदौली जिले के बबुरी निवासी दिलीप कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। शनिवार सुबह वे अपने पिता सियाराम मौर्या का इलाज कराने सर सुंदरलाल चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर में पहुंचे। हड्डी रोग विभाग (BHU) की ओपीडी में पर्चा जमा कर वे डॉक्टर से मिलने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच उन्होंने ओपीडी में तैनात बाउंसर से मरीज का नंबर पूछा। आरोप है कि इतना पूछते ही बाउंसर भड़क उठा और धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
पीड़ित के मुताबिक, जब उन्होंने विरोध किया तो बाउंसर ने अपने अन्य साथियों को बुला लिया। सभी ने मिलकर उन्हें ओपीडी (BHU) के भीतर ही एक कमरे में बंद कर दिया और जमकर लात-घूंसों से पीटा। इस दौरान उनकी शर्ट भी फाड़ दी गई।
मारपीट की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में बीएचयू के छात्र मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बाउंसरों और ट्रॉमा सेंटर प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया। सूचना मिलते ही लंका पुलिस और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंच गए।
घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में दिलीप कुमार को रोते-बिलखते देखा जा सकता है, जिसमें वे बाउंसरों पर गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। पीड़ित ने लंका थाने में लिखित तहरीर दी है। थानाध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने बताया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक घटना उस समय हुई जब ट्रॉमा सेंटर प्रभारी सौरभ सिंह की ओपीडी चल रही थी। छात्रों का आरोप है कि पूरे प्रकरण में प्रबंधन की भी लापरवाही रही, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।