Election Histroy 1957: देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। पूरी दुनिया की नजरें भारत के इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पिछले जीत और हार से सब लेते हुए आगे की रणनीति बना रहे हैं। देश की आजादी के 75 सालों बाद हो रहा यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। इसी बीच आज हम बात करेंगे भारत के उस चुनाव की, जब स्वतंत्र भारत में पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हुए।
वर्ष 1947, जब भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली। इसके तुरंत बाद वर्ष 1951-52 में आम चुनाव हुए। यह चुनाव सिर्फ इसलिए बेहद अहम नहीं था कि यह ऐतिहासिक चुनाव था, स्वतंत्र भारत का पहला चुनाव था बल्कि इसलिए भी अहम था कि सारी दुनिया की निगाह इस पर टिकी थी। सबके मन में यह सवाल था कि नया-नया आजाद हुआ भारत क्या लोकतंत्र की इतनी बड़ी कवायद को सफलतापूर्वक अंजाम दे पाएगा। लोकसभा के साथ-साथ राज्यों की विधानसभाओं के भी चुनाव होने थे। मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन के कुशल नेतृत्व में जब चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए तो दुनिया हैरान रह गई।
एक ऐसा देश, जो अभी-अभी बदहाली से गुजरा था, जहां हर 10 में से 2 व्यक्ति भी शिक्षित नहीं रहे, वहां सफलतापूर्वक लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराना अपने आप में चुनौती थी। 21 वर्ष या उससे ऊपर के सभी महिला-पुरुषों को मताधिकार था। घर-घर जाकर 17.3 करोड़ वोटरों को पंजीकृत करना ही अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण था। ऐसी भी महिलाएं थीं, जो नाम पूछने पर अपना परिचय फलां की पत्नी या फलां की मां के तौर पर देती थीं।

इस चुनौती से निपटने के लिए चुनाव से पहले चुनाव आयोग की तरफ से बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाया गया था। पोलिंग बूथ पर पार्टियों या स्वतंत्र उम्मीदवारों के चुनाव चिह्न वाले अलग-अलग बैलट बॉक्स रखे गए ताकि वोटर अपने मतपत्र को संबंधित बैलट बॉक्स में डाल सकें। लोहे की 2 करोड़ से ज्यादा बैलट बॉक्स बनाए गए और करीब 62 करोड़ बैलट पेपर छापे गए थे।
तब परिवहन के सीमित संसाधन थे, ऐसे में पोलिंग बूथों तक बैलट बॉक्स पहुंचाना कितनी बड़ी चुनौती रही होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। आखिरकार इन सभी चुनौतियों से पार पाते हुए सुकुमार सेन के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने इस ऐतिहासिक चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

Election Histroy: 68 चरणों में संपन्न हुआ था पहला चुनाव
पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक करीब 4 महीनों में और 68 चरणों में संपन्न हुआ। उस समय लोकसभा की कुल 489 सीटें थीं लेकिन संसदीय क्षेत्र 401 ही थे। 314 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे, जहां से सिर्फ एक-एक प्रतिनिधि चुने जाने थे। 86 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे जहां एक साथ 2 लोगों को सांसद चुना जाना था। इनमें से एक सामान्य वर्ग से और दूसरा सांसद एससी/एसटी समुदाय से चुना गया। एक संसदीय क्षेत्र नॉर्थ बंगाल तो ऐसा भी रहा, जहां से 3 सांसद चुने गए।
पहले आम चुनाव में कुल 1874 उम्मीदवारों ने अपना दम दिखाया। मतदाता के लिए तब न्यूनतम उम्र 21 वर्ष थी और कुल 36 करोड़ आबादी में करीब 17।3 करोड़ मतदाता थे। जवाहर लाल नेहरू की अगुआई में कांग्रेस के अलावा श्रीपाद अमृत डांगे के नेतृत्व में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारतीय जन संघ (जो बाद में बीजेपी बना), आचार्य नरेंद्र देव, जेपी और लोहिया की अगुआई वाली सोशलिस्ट पार्टी, आचार्य कृपलानी के नेतृत्व में किसान मजदूर प्रजा पार्टी समेत कुल 53 छोटे-बड़े दल मैदान में थे। इस पहले आम चुनाव में कुल 45।7 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।