- संभाव का गुण रखने वाला हो मेयर
- जन समस्याओं पर तत्काल ले सके निर्णय, आसानी से सुलभ हो सके
- चिकित्सीय सुविधाओं व सेवाओं पर हो विशेष ध्यान, शिकायत पर ले एक्शन
राघवेन्द्र केशरी
वाराणसी। निकाय चुनाव आते ही उम्मीदवारों में जहां चुनाव मैदान में उतरने की ललक है वहीं मतदाताओं भी इस बार अपने संभावित प्रत्याशी से आस लगाए बैठे हैं। इसी कड़ी में जनदसंदेश टाइम्स की ओर से बनारस के अधिवक्ताओं से हमारा मेयर कैसा हो पर चर्चा की गई। जिसपर उन्होंने अपनी बेबाकी से राय रखी। बताया कि हर बार की तरह इस बार का चुनाव दलगत राजनीति से हटकर विकास और जन सुविधाओं पर आधारित होना चाहिए। जिसमें जनप्रतिनिधि सुलभता से जनता के बीच उपलब्ध होने के साथ उसके अंदर संभाव का भी गुण विद्यमान हो। बताया कि हमारा महापौर ऐसे होना होना चाहिए जो सभी को सरलता से उपलब्ध होने के साथ समास्याओं पर त्वरित रूप से एक्शन ले सके। ऐसा न हो कि हर बार की तरह इस बार भी वह चुनाव के दौरान जनता के बीच आए और चुनाव जीतने के बाद नजरों से ओझल न हो जाए। उनका दूरभाष भी संपर्क के बाहर न हो या कोई समर्थक फोन उठाकर यह न कह दे कि अभी साहब व्यस्त हैं। ऐसे ही विचार व्यक्त करते हुए नगर के अधिवक्ताओं ने अपनी राय दी। कुछ ने बताया कि जनता के लिए एक विशेष जनसुनवाई की व्यवस्था हो तो प्रति सप्ताह महापौर की निगरानी में अधिकारियों के साथ लोगों की शिकायतों पर निर्णय ले सके। महानगर में आने वाले निगम सीमा क्षेत्रों में मूलभूत सुविधओं पर विशेष ध्यान देने वाला हो। साथ ही स्पष्ट निर्देश देकर कार्रवाई करा सके। नगर के अन्य अधिकरियों से सामन्जस्य स्थापित कर सभी जनता की समस्याओं को खुद पर एक आम नागरिक के तौर पर आंककर देख सके।
चिकित्सकिय सुविधा पर दे विशेष ध्यान
इस बार महापौर का चुनाव ऐसा होना चाहिए, जो चिकित्सकिय सुविधा पर विशेष जोर दे सके। कोरोना काल से ही लोगों को चिकित्सकिय सुविधाओं की ज्यादा दरकार है। शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में जन सामान्य के लिए उत्तम चिकित्सा की व्यवस्था करा सके। महापौर की यह ओर से इलाज संबंधी सुविधाओं के लिए समस्या हाने पर एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया जाना चाहिए। ताकि लोग सुविधा न मिलने पर उसपर शिकायत दर्ज करा सकें। नगर का प्रथम व्यक्ति होने के नातकारे महापौर का यह दायित्व होना चाहिए कि समाज के सभी वर्गों को एक निगाह से देखे और उनके साथ एक सामान्य व्यवहार कर सभी को सुविधा मुहैया कराए।
महापौर के अंदर संभाव का गुण हो, विशेष परिस्थितियों में जनता को तत्काल सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। प्रशासनिक कार्यों की समस्या पर भी लोगों की ओर से पैरवी कर सके।

- दीपक कुमार राय (कान्हा) अधिवक्ता
आसानी से उपलब्ध हो, जनसुविधाओं के को सामान्य लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था कर सके, शहर की स्वच्छता, चिकित्सा और पेजयल की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने वाला हो।

- अरुण कुमार मौर्य, अधिवक्ता
कोरोना काल से लोगों को चिकित्सकिय सुविधओं की ज्यादा आवश्यकता पड़ रही है। जिसके लिए महंगे महंगे इलाज और दवाइयों का बोझ उनको आर्थिक ओर मानसिक तौर पर कमजोर कर रहा है। महापौर इनपर विशेष ध्यान देने वाला चाहिए।

- प्रमोद कुमार मौर्य, अधिवक्ता
महापौर ऐसा हो जो दलगत सोच से उपर उठकर काम करे, किसी भी प्रकार से उनमें पक्षपात की भावना न हो, सेवाभाव के साथ उसको कार्य का अनुभाव हो, जो किसी भी परिस्थिति में आम जनमानस की दिक्कतों को सुनकर उसका निवारण कर सके।

- विकास चौहान, अधिवक्ता
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निकाय चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि अभी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। लेकिन विभिन्न पार्टियों में संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी की कवायद परवान चढ़ रही है। भारतीय लोकतंत्र में उम्मीदवारों का चयन पार्टियों द्वारा होता है। वो जिसे टिकट देती है, वही चुनावी जुंग में ताल ठोकते हैं। पार्टियों के चयन का अपना पैमाना होता है, उनकी तवज्जो सिर्फ जिताऊ कैंडिडेट पर होती है। इस प्रक्रिया में मतदाता की राय कोई मायने नहीं रखती। मेयर प्रत्याशी के गुण दोष को लेकर लोग क्या सोचते हैं? इसे सामने लाने के मकसद से जन्संदेश टाइम्स ने ‘अपना मेयर कैसा हो?’ श्रृंखला शुरू की है।
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