Kargil Vijay Diwas: साहस, वीरता और जज्बे की ऐसी कहानी, जो सदियों तक याद की जाएगी। आज से ठीक 24 वर्ष पहले एक युद्ध (Kargil) में भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी। उस दिन भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान को बता दिया था कि कश्मीर पर कब्ज़ा करना पाकिस्तान का धूरा सपना ही रहेगा। पाकिस्तान को पता है कि भारत अब और कफ़न नहीं, बल्कि घर में घुसकर मारेगा।
26 जुलाई का वह दिन भारत के इतिहास की किताब में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। इन सुनहरे अक्षरों में भारत के बलिदानियों का रक्त मिला हुआ था। इस दिन भारत ने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाई थी। वह दिन था, आज का यानी 26 जुलाई, जिसे पूरा देश कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के रूप में मनाता है।

वैस तो आपने कारगिल (Kargil) युद्ध के कई किस्से सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको ऐसे ही कुछ किस्सों के बारे में बताएंगे, जो आपको एक भारतीय होने पर गर्व का एहसास दिलाएंगे।
Kargil Vijay Diwas: नींबू साहब के बलिदान का भारत कर्जदार
भारतीय सेना में अत्यंत काबिल अधिकारी नींबू साहब थे। नींबू साहब का असली नाम ‘नीकेझाकुओ केनगुरुसे (Captain Neikezhakuo Kenguruse)’ था। सब इन्हें नींबू साहब के नाम से ही बुलाते थे।
द्रास पर जब चढ़ने की बारी आई तो सभी के हाथ पैर फूल गए। 16 हजार फीट की ऊंचाई, माइनस 10 डिग्री का तापमान, जवानों को चोटी पर कब्ज़ा करना था, ऊपर से पाकिस्तानियों को भगाना था। इस पूरे टीम में सबसे आगे नींबू साहब थे। नींबू साहब ने इस दौरान जब चढ़ने की कोशिश की, तो उनके जूते फिसलने लगे। लेकिन तभी कुछ सोचकर उन्होंने अपने जूते उतारने शुरू कर दिए। हालांकि इतनी ठंड में जूते उतारना खतरनाक हो सकता था, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले उन्होंने पाने जूते और मोज़े उतार दिए और नंगे पैर चट्टान पर ऊपर चढ़ गए।
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इसके बाद धीरे-धीरे अपने बाकी साथियों को भी ऊपर चढ़ाया। ऊपर चढ़ने के बाद नींबू साहब ने राकेट लांचर से फायर किया और एक के बाद एक करके सात पाकिस्तानी बंकरों को तबाह कर दिया। जवाबी फायरिंग में नींबू साहब की गोली लगी। लेकिन कहते हैं न कि जब दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मौत भी पल भर के लिए दो कदम पीछे खिसक जाती है। नींबू साहब गोली लगने क्ले बावजूद दुश्मनों से लड़ते रहे। उस दिन ऐसा लगा जैसे मानो, नींबू साहब में साक्षात् मां दुर्गा का वास हो गया हो।
नींबू साहब के साथियों ने दुश्मनों से लोहा (Kargil Vijay Diwas) लेते हुए पोस्ट को अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन जब वे पीछे मुड़े, तो नींबू साहब खाई में गिर चुके थे। नींबू साहब देश के लिए शहीद हो चुके थे। साथियों की आंखों में आंसू थे। सब बस एक ही बात दोहरा रहे थे- ‘ये आपकी जीत है नींबू साहब, ये आपकी जीत है।’
पाकिस्तानी फौजी का भारतीय कमांडर से सामना
अभी टाइगर हिल (Kargil) पर हमला हुआ नहीं था कि उससे दो दिन पहले हिन्दुस्तानी सेना ने एक पाकिस्तानी फौजी मोहम्मद अशरफ को पकड़ लिया था। वह बुरी तरह जख्मी था। ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा ने अपने जवानों से उसे उनके सामने लाने को कहा। पाकिस्तानी फौजी को जब ब्रिगेडियर के सामने पेश किया गया और उसके आंखों पर बंधी पट्टी खोली गई, तो वह उनके सामने रोने लगा।
इस बाबत जब ब्रिगेडियर ने रोने की वजह पूछी, तो वह बहुत ही चौकाने वाला था। पाकिस्तानी फौजी ने बताया कि उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी कमांडर नहीं देखा था। पाकिस्तान में इतना बड़ा अफसर उनसे बात करना तो दूर, उनके पास भी नहीं भटकता। इस कारण वह इतने हाई रैंकिंग अफसर को अपने सामने देख रोने लगा।

Kargil Vijay Diwas: भारत के साथ आया इजराईल
भारत और पाकिस्तान में जंग तेज हो चली थी। भारत जंग (Kargil Vijay Diwas) समाप्त करने के लिए अपना पूरा जोर लगा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं भारत को भी यह बात अच्छे से पता थी कि यह जंग अभी लम्बी चलेगी। इसे जीतने के लिए एडवांस इक्विपमेंट्स की आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही अब कारगिल की लड़ाई में इंडियन एयरफ़ोर्स की भी एंट्री हो गई थी। जिसके बाद अब इस जंग में मिराज फाइटर जेट का इस्तेमाल किया गया था।

उस समय मिराज से दुश्मन को टारगेट करने में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद भारत ने इजराईल से सम्पर्क किया। दरअसल, भारत ने इजराईल से जल्द डिलीवरी की बात कही, जिसमें अभी काफी वक़्त था। इजराईल ने भारत की परिस्थितियों को नजरअंदाज न कर उसे समझते हुए अपने इंजिनियर भारत भेजे, जिसके बाद मिराज फाइटर जेट्स में स्पेशल डिवाइस को लगाया गया। जिससे दुश्मन को टारगेट करने में आसानी हो।
जब गलत संदेश के कारण सेना को मिली चुनौती
उस वक्त भारत के रक्षा मंत्री जार्ज फ़र्नांडिस थे। टाइगर हिल अब भी भारत के हाथ से बाहर था। पाकिस्तानी घुसपैठिए उसपर कब्जा जमाए बैठे थे। भारत के 2 जांबाज अफसर लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह और कैप्टन सचिन निंबाल्कर टाइगर हिल फतह करने से बस 50 मीटर ही नीचे (Kargil Vijay Diwas) थे। ब्रिगेड मुख्यालय तक संदेश पहुंचा, ‘दे आर शॉर्ट ऑफ़ द टॉप।’ यानी कि टाइगर हिल की चोटी अब बस कुछ ही दूर है।

श्रीनगर से दिल्ली पहुंचते-पहुंचते इस संदेश की भाषा बिलकुल बदल गई थी। दिल्ली में इसे ‘दे आर ऑन द टाइगर टॉप’ समझा गया। फिर क्या था, जिस वक्त ये खबर रक्षा मंत्री तक पहुंची उस दौरान वो पंजाब में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ऐलान कर दिया कि टाइगर हिल पर अब भारत का कब्ज़ा हो गया है। हालांकि भारतीय सेना ने बाद में टाइगर हिल पर भारत का झंडा फहरा दिया था।