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Home धर्म कर्म

कर्ण की मृत्यु का कारण बना भगवान परशुराम व्दारा दिया गया श्राप

by Lucknow Tutorial Team
May 25, 2023
in धर्म कर्म
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कर्ण की मृत्यु का कारण बना भगवान परशुराम व्दारा दिया गया श्राप
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भगवान परशुराम विष्णु के एक ऐसे अवतार हैं जो चिरंजीवी हैं। इसी कारण वे विष्णु के अन्य अवतारों के समयकाल में भी थे और अभी भी जीवित हैं। इसी के साथ उन्होंने भगवान विष्णु के बाद के अवतारों में भी अपनी भूमिका निभाई थी। यह महाभारत काल के समय की बात है जब भगवान परशुराम के द्वारा तीन महान योद्धाओं ने शिक्षा ग्रहण की थी जो थे भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य तथा दानवीर कर्ण। इसमें से कर्ण ने परशुराम से असत्य बोलकर शिक्षा ग्रहण की थी जिसका विपरीत फल भी उसे भोगना पड़ा था। आज हम उसी कथा के बारे में जानेंगे।

परशुराम और कर्ण की कथा


कर्ण की शिक्षा ग्रहण करने की लालसा
कर्ण वैसे तो माता कुंती का पुत्र था लेकिन वह कुंती के विवाह से पहले जन्म ले चुका था। इसलिए कुंती ने लोक-लज्जा के भय से उसका त्याग कर दिया था तथा नदी में बहा दिया था। कुंती इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि कर्ण सूर्य देव का पुत्र हैं, इसलिए उसकी रक्षा हो जाएगी। नदी में बहाने के पश्चात उसका पालन-पोषण एक सूत के घर में हुआ था, इसलिए कर्ण को सूत पुत्र भी कहा जाता है। स्वयं कर्ण को भी नहीं पता था कि उसकी माँ का नाम कुंती है तथा वह एक क्षत्रिय कुल से है।

क्षत्रिय कुल से होने के कारण उसके अंदर पहले से ही अस्त्र-शस्त्र की विद्या प्राप्त करने की इच्छा थी। एक दिन इसी इच्छा स्वरूप वह गुरु द्रोणाचार्य के पास गया तथा उनसे शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा प्रकट की। चूँकि कर्ण एक सूतपुत्र था, इसलिए गुरु द्रोणाचार्य ने उसे शिक्षा देने से मना कर दिया।

कर्ण का भगवान परशुराम से झूठ बोलना
गुरु द्रोणाचार्य के द्वारा नकारे जाने के पश्चात कर्ण क्रोध से भर उठा और अब उसमें गुरु द्रोणाचार्य के शिष्यों से भी महान योद्धा बनने की चाह जाग उठी। इसी आशा से वह भगवान परशुराम के आश्रम पहुंच गया। परशुराम ने ही द्रोणाचार्य को शिक्षा प्रदान की थी, इसलिए कर्ण सीधे उन्हीं के पास गया। चूँकि भगवान परशुराम केवल ब्राह्मणों तथा विशिष्ट मनुष्यों को ही अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे, इसलिए कर्ण ने ब्राह्मण वेशभूषा धारण कर एक ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया।

ब्राह्मण वेश में कर्ण भगवान परशुराम के पास गया तथा स्वयं को ब्राह्मण पुत्र बताया। इसी के साथ उसने उनसे शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की। भगवान परशुराम ने भी उसे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया। कर्ण परशुराम के सभी शिष्यों से अधिक तेज तथा बुद्धिमान था, इसलिए उसने बहुत तेजी से सब ज्ञान ले लिया। भगवान परशुराम भी कर्ण की योग्यता से प्रसन्न थे। उन्होंने कर्ण को अपना संपूर्ण ज्ञान दिया तथा हर अस्त्र-शस्त्र चलाने के मंत्र सिखा दिए। कर्ण ने भगवान परशुराम से ब्रह्मास्त्र चलाने का मंत्र भी सीख लिया था।

परशुराम ने कर्ण को कौन सा श्राप दिया
एक दिन भगवान परशुराम थके हुए थे, इसलिए उन्होंने सोने की इच्छा प्रकट की। वे कर्ण की गोद में अपना सिर रखकर सो गए। उसी समय एक रक्त चूसने वाला कीड़ा कर्ण की जांघ में घुस गया तथा उसे डंक मारने लगा। कर्ण को उस कीड़े के द्वारा रक्त चूसने से बहुत पीड़ा हुई लेकिन वह हिलता तो उसके गुरु की निद्रा टूट जाती। इसलिए वह उसी अवस्था में पीड़ा सहन करते हुए बैठा रहा।

वह कीड़ा लगातार उसका रक्त चूसता जा रहा था जिस कारण वहां बहुत बड़ा घाव हो गया था। साथ ही उसमें से रक्त बहकर बाहर निकलने लगा था। वह रक्त बहता हुआ भगवान परशुराम के पास भी पहुंचा जिससे उनकी निद्रा टूट गयी। जब उन्होंने उठकर सब देखा तो उन्हें यह ज्ञान हो गया कि कर्ण ब्राह्मण पुत्र नही हो सकता क्योंकि एक ब्राह्मण पुत्र में इतनी पीड़ा सहन करने की शक्ति नही हो सकती।
उन्होंने जान लिया कि इतनी पीड़ा केवल एक क्षत्रिय ही सहन कर सकता है। इसी के साथ उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा क्रोध था कि उनके शिष्य ने उनसे असत्य कहकर छलपूर्वक उनसे शिक्षा ग्रहण की हैं जबकि अपने शिष्यों को चुनने का अधिकार केवल एक गुरु का होता है। एक शिष्य की पहचान उसके गुरु से ही होती है लेकिन कर्ण ने असत्य बोलकर उनसे शिक्षा ग्रहण की थी।

इससे वे अत्यधिक क्रोध में आ गए तथा कर्ण को श्राप दिया कि वह जिस विद्या को सीखने यहाँ आया था वह उसका प्रयोग तो कर पायेगा तथा सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर भी बनेगा लेकिन जब उसको अपनी इसी विद्या की सबसे अधिक आवश्यकता होगी तब वह उसे भूल जायेगा।

कर्ण की मृत्यु कैसे हुई
भगवान परशुराम के द्वारा दिया गया यही श्राप कर्ण की मृत्यु का कारण बना था। भगवान परशुराम के द्वारा प्राप्त की गयी शिक्षा से कर्ण ने अपने जीवन में कई युद्ध जीते और कई महान योद्धाओं पर विजय प्राप्त की लेकिन उसे अपनी विद्या की सबसे ज्यादा आवश्यकता महाभारत के युद्ध के समय थी।

भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य के वध के पश्चात कर्ण को कौरवों की सेना का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। वह पांडवों की सेना में त्राहिमाम मचाता हुआ आगे बढ़ रहा था कि तभी उसके सामने भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन का रथ लेकर आ गए।

युद्ध भूमि में कर्ण अर्जुन के सामने पहली बार आया था और विश्व में इन्हीं दो योद्धाओं को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर की उपाधि प्राप्त थी। किंतु भगवान परशुराम के दिए गए श्राप के अनुरूप कर्ण उस समय अपनी सारी विद्या भूल गया और दैवीय अस्त्र-शस्त्रों को चलाने के मंत्र भूल गया।

इसी का लाभ उठाकर और भगवान श्रीकृष्ण के आदेशानुसार अर्जुन ने कर्ण का वध कर दिया। इस प्रकार महाभारत के भीषण युद्ध में कर्ण की मृत्यु का कारण भगवान परशुराम से छल के द्वारा शिक्षा प्राप्त करना और उसके परिणामस्वरुप मिला श्राप था।

Anupama Dubey

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Tags: कर्ण की मृत्युभगवान परशुरामभगवान परशुराम व्दारा दिया गया श्राप
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