Kashi Ganga Mahotsav 2025: उत्तर वाहिनी मां गंगा के पावन तट पर इस वर्ष भी काशी की आस्था और संस्कृति का महापर्व गंगा महोत्सव भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है। इससे जुडी महत्वपूर्ण जानकारी मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने गुरूवार को मीडिया से बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष काशी गंगा महोत्सव का आयोजन 1 नवंबर से 4 नवंबर 2025 तक राजघाट पर किया जाएगा, जबकि देव दीपावली का आयोजन 5 नवंबर को मनाया जाएगा।
Kashi Ganga Mahotsav 2025: कई गणमान्य रहेंगे उपस्थित
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बताया कि यह आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन में एक नए कलेवर में किया जा रहा है। महोत्सव (Kashi Ganga Mahotsav 2025) का शुभारंभ 1 नवंबर को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दीप प्रज्ज्वलन कर करेंगे। उनके साथ कई गणमान्य अतिथि और अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
शास्त्रीय, लोक, नृत्य और आधुनिक संगीत — की प्रस्तुतियां
मंडलायुक्त ने बताया कि गंगा महोत्सव में संगीत की सभी विधाओं — शास्त्रीय, लोक, नृत्य और आधुनिक संगीत — की प्रस्तुतियां होंगी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन (Kashi Ganga Mahotsav 2025) में कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से काशी की संस्कृति और गंगा की महिमा को जीवंत करेंगे।
10 लाख से अधिक मिट्टी के दीपक जलाने की व्यवस्था
पर्यटन विभाग और महोत्सव समिति द्वारा इस वर्ष 10 लाख से अधिक मिट्टी के दीपक जलाने की व्यवस्था की गई है। दीपक, तेल और बाती का वितरण 31 अक्टूबर से राजघाट से शुरू होगा। गंगा (Kashi Ganga Mahotsav 2025) के घाटों और पार के तटों को मिलाकर 20 सेक्टर बनाए गए हैं, जहां एक साथ दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। सभी सेक्टरों में नोडल अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
देव दीपावली के दिन वाराणसी में एक विशेष आकर्षण होगा — 25 मिनट का 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो, जिसमें काशी की दिव्यता, इतिहास और आस्था का अनूठा संगम दिखाया जाएगा।
कार्यक्रम (Kashi Ganga Mahotsav 2025) की शुरुआत शंखनाद और डमरू की गूंज से होगी, जो भगवान शिव की उपस्थिति का प्रतीक होगी। इसके बाद दर्शकों को एक दिव्य यात्रा पर ले जाया जाएगा — भगवान शिव-पार्वती विवाह, विष्णु के चक्र पुष्करिणी कुंड, भगवान बुद्ध के धर्मोपदेश, कबीर और तुलसीदास की भक्ति परंपरा, और महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना तक।
गंगा द्वार के सामने 10 मिनट की ग्रीन आतिशबाजी
‘कण-कण में काशी, रस-रस में बनारस’ थीम पर आधारित यह शो पर्यटकों के लिए रात्रि में तीन बार निःशुल्क प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा 8 मिनट का लेजर शो भी इसकी भव्यता बढ़ाएगा। वहीं श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार के सामने 10 मिनट की ग्रीन आतिशबाजी भी आयोजित की जाएगी, जो रात्रि 8:00 बजे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क होगी।

