Varanasi: महाशिवरात्रि का पावन पर्व… देवाधिदेव महादेव के विवाह की तैयारियों में डूबी विश्वनाथ नगरी और इसी बीच ब्रज से आई एक ऐसी सौगात, जिसने श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक एकता को नई ऊँचाई दे दी। इस बार बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव में केवल काशी ही नहीं, बल्कि मथुरा के कान्हा का भाव भी जुड़ गया।
पहली बार ऐसा हुआ, जब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से बाबा विश्वनाथ के विवाह के लिए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री और पंचमेवा काशी भेजे गए। यह केवल उपहारों का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि हरि-हर के अद्वैत भाव का जीवंत साक्षात्कार था—जहां शिव और कृष्ण, काशी और मथुरा, आस्था और परंपरा एक सूत्र में बंधती नजर आईं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान विश्वेश्वर के विवाह के लिए मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थली से विशेष रूप से तैयार की गई विवाह सामग्री काशी (Varanasi) पहुंची। इनमें शिव विवाह में प्रयुक्त होने वाले वस्त्र, आभूषण, श्रृंगार सामग्री, नेग-पंचमेवा, फलाहारी चढ़ावा और अन्य पावन उपहार शामिल थे।
सोमवार को मथुरा से आए श्रीकृष्ण जन्मस्थली के प्रतिनिधि जब काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, तो मंदिर न्यास और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। डमरू, शंख और मंत्रोच्चार की गूंज के बीच यह सामग्री विधिवत बाबा को समर्पित की गई। महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ का भव्य श्रृंगार इन्हीं वस्त्रों और आभूषणों से किया जाएगा।
ब्रज से काशी तक श्रद्धा की हो रही पुष्पवर्षा
मथुरा में सूर्योदय के बाद विशेष वाहन से विवाह सामग्री काशी के लिए रवाना हुई। विदाई के समय ब्रजवासियों ने हरि-हर के स्वरूप का स्मरण करते हुए पुष्पवर्षा की। यह दृश्य स्वयं में अद्भुत था—जहां कान्हा की नगरी से बाबा के लिए शुभाशीष और प्रेम का प्रवाह काशी की ओर बढ़ चला।
काशी विश्वनाथ धाम (Varanasi) पहुंचते ही श्रद्धालुओं और मंदिर न्यास ने भी उसी भाव से स्वागत किया। पुष्पवर्षा, आरती और जयकारों के बीच यह संदेश साफ था कि सनातन परंपरा केवल ग्रंथों में नहीं, बल्कि जीवंत आचरण में बसती है।
Varanasi: रंगभरी एकादशी से आगे बढ़ी परंपरा
काशी और मथुरा के बीच धार्मिक सौहार्द की यह परंपरा नई नहीं है, लेकिन इस वर्ष यह और सशक्त रूप में सामने आई। इससे पहले रंग भरी एकादशी के अवसर पर मथुरा से बाबा विश्वनाथ के लिए अबीर-गुलाल भेजे जाते रहे हैं। पिछले वर्ष श्री काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थली के सहयोग से नेग और उपहारों के आदान-प्रदान की औपचारिक शुरुआत हुई थी।
उसी क्रम में विश्वनाथ धाम (Varanasi) की ओर से लड्डू गोपाल के लिए भस्म, अबीर-गुलाल, फल-फूल, मिठाई, वस्त्र और अन्य सामग्री मथुरा भेजी गई थी। अब शिव विवाह की सामग्री का मथुरा से काशी आना इस परंपरा का विस्तार है, जिसने सनातन सांस्कृतिक समन्वय को और गहरा कर दिया।
सनातन सांस्कृतिक का नजर आया समन्वय
मंदिर न्यास के अधिकारियों ने बताया कि काशी–मथुरा के मध्य सनातन सांस्कृतिक समन्वय की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मथुरा से पधारे सम्मानित प्रतिनिधियों का विधिवत स्वागत किया गया। भगवान विश्वेश्वर के लिए लाए गए पावन उपहारों को महाशिवरात्रि (Varanasi) पर्व पर श्रद्धापूर्वक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने स्वीकार किया।
डमरू-शंख और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह भेंट स्वीकार की गई, जो इस बात का प्रतीक है कि शिव और कृष्ण की परंपराएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सनातन धारा की अभिव्यक्ति हैं।
शिव को समर्पित उपहारों के अवलोकन के उपरांत, मथुरा से पधारे प्रतिनिधियों को भी विश्वनाथ धाम (Varanasi) की ओर से सम्मान स्वरूप भेंट प्रदान की गई। लड्डू गोपाल के आदरणीय प्रतिनिधियों को विधिपूर्वक दक्षिणा और भेंट देकर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विदा किया।

