Mahashivratri के पावन अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी काशी में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। लाखों की संख्या में दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने पंचक्रोशी यात्रा की और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। शनिवार की शाम शुरू हुआ यह सिलसिला रविवार शाम तक अनवरत जारी रहा। सबसे पहले यात्रा का शुभारंभ मणिकर्णिका घाट पर गंगा स्नान के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका कुंड (Mahashivratri) से संकल्प लेकर 80 किलोमीटर लंबी पंचक्रोशी पदयात्रा की शुरुआत की। मान्यता है कि इस यात्रा को पूर्ण करने से कष्टों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है।

संकल्प से शुरू हुई परिक्रमा
सिर्फ बनारस ही नही पुरे पूर्वांचल से आए श्रद्धालु मणिकर्णिका कुंड पर पहुंचने लगे। रात होते-होते घाट पर भारी भीड़ जुट गई। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने ज्ञानवापी कुएं पर संकल्प लिया और परिक्रमा पथ पर पैदल यात्रा आरंभ की। श्रद्धालु रातभर चलते हुए अपने पहले पड़ाव कर्मदेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना की गई।

Mahashivratri: पांच पड़ावों से होकर पूरी हुई यात्रा
पंचक्रोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर स्थित पांचों पांडव और अंतिम पड़ाव कपिलधारा में दर्शन-पूजन किया। 24 घंटे के भीतर लगभग 80 किलोमीटर की यह कठिन पदयात्रा पूरी की गई।

यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर टेंट और विश्राम की व्यवस्था की गई थी, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस आस्था यात्रा में बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक बड़ी संख्या में शामिल रहे। पांचों पड़ावों पर दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु पुनः मणिकर्णिका घाट पहुंचकर अपने संकल्प का समापन करेंगे।

