वाराणसी की राजनीति इन दिनों मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर केंद्रित है। समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घाट की स्थिति देखने के लिए रवाना होना चाहता था, लेकिन पुलिस (Manikarnika Ghat) की रोक-टोक ने हालात को टकराव में बदल दिया। सांसद वीरेंद्र सिंह की पुलिस से तीखी नोकझोंक और सड़क पर धरना इस विवाद को और गरमा गया है। सवाल उठ रहा है—सरकार आखिर क्या छिपाना चाहती है?
पुलिस की घेराबंदी और नजरबंद
प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने से पहले ही पुलिस (Manikarnika Ghat) ने सपा नेताओं को नजरबंद कर दिया। सर्किट हाउस और सांसद वीरेंद्र सिंह के अर्दली बाजार आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद सपा नेता घाट जाने की कोशिश करते रहे, जिससे कई जगह धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। पुलिस ने सख्त घेराबंदी कर रास्ता रोक दिया।

Manikarnika Ghat:सांसद का धरना और सवाल
सांसद वीरेंद्र सिंह ने पुलिस से तीखी बहस के बाद सड़क पर धरना दे दिया। उनके साथ पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल और वरिष्ठ नेता किशन दीक्षित भी बैठ गए। वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार सच को सामने नहीं आने देना चाहती। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संसद भवन में भी उठाया जाएगा।
एडीसीपी नीतू कादयान ने स्पष्ट किया कि पहले सात लोगों को अनुमति दी गई थी, लेकिन भीड़ बढ़ने के कारण रोक लगानी पड़ी। उन्होंने कहा कि ऊपर से अनुमति मिलते ही प्रतिनिधिमंडल को जाने दिया जाएगा।
नेताओं की नाराज़गी और आरोप
सपा के वरिष्ठ नेता किशन दीक्षित ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण के दौरान सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त किया और अब मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता 2027 में इस तानाशाही का जवाब देगी। वहीं, पूर्व मंत्री मनोज राय धूपचंडी ने कहा कि सपा प्रतिनिधिमंडल काशीवासियों का दर्द सुनने जा रहा था, लेकिन सरकार ने उन्हें घरों में कैद कर दिया।
मणिकर्णिका घाट का ऐतिहासिक महत्व
मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। इसे देवी अहिल्याबाई होल्कर ने 1771 में बनवाया और 1791 में जीर्णोद्धार कराया। पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु की मणि गिरी थी। घाट की स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था इसे विशेष बनाती है।
निर्माण कार्य और विवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में घाट पुनर्निर्माण (Manikarnika Ghat) का शिलान्यास किया था। बाढ़ के कारण काम रुका रहा, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। हाइड्रा मशीन से घाट तोड़े जाने पर लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि 300 साल पुरानी संरचना हटाई गई है। हालांकि, डीएम सत्येंद्र ने कहा कि मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया है और गलत वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई होगी।
मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) का विवाद अब सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया है। सपा नेताओं का धरना और पुलिस (Manikarnika Ghat) की रोक-टोक इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा। काशी की आत्मा और विरासत की रक्षा का दावा करने वाली सपा और विकास का चेहरा दिखाने वाली सरकार—दोनों के बीच यह टकराव जनता के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

