वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षा गृह में भारतीय गाय जैविक कृषि एवं पंचगव्य चिकित्सा पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि और आयुर्वेद चिकित्सा के पारंपरिक विज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस संगोष्ठी में जैविक खेती में भारतीय नस्ल की गायों की भूमिका और पंचगव्य चिकित्सा के लाभों पर विस्तृत चर्चा की गई।

BHU: जैविक कृषि को खाद्य आवश्यकताओं के लिए बताया आवश्यक
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर औपचारिक रूप से कार्यक्रम (BHU) की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कृषि पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि भारतीय नस्ल की गायें सदियों से हमारे कृषि तंत्र का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उन्होंने जैविक कृषि को देश की बढ़ती खाद्य आवश्यकताओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक बताया।

पंचगव्य चिकित्सा, जो कि गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से तैयार की जाती है, के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी (BHU) में देश भर के कृषि वैज्ञानिक, आयुर्वेद विशेषज्ञ, और जैविक खेती के विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।

यह संगोष्ठी (BHU) भारतीय कृषि और चिकित्सा पद्धतियों को पुनर्जीवित करने और उन्हें समकालीन संदर्भ में प्रासंगिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। भारतीय गाय आधारित खेती और चिकित्सा पद्धति को लेकर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी भविष्य में ऐसे और प्रयासों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
Comments 1