Navratri 4th Day: शारदीय नवरात्र के नव दुर्गा के दर्शन-पूजन करने के क्रम में चतुर्थी तिथि पर बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा का दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। भक्तों ने मां दुर्गा को नारियल, चुनरी, अड़हुल की माला अर्पित कर अपने परिवार के सुख समृद्धि व सौभाग्य की कामना की। मंदिर में दर्शन करने को लेकर सड़क के बाहर काफी लंबी दूरी तक भक्तों की कतारें लगी रही। इनमें महिलाओं के साथ पुरुष भी शामिल थे। मां का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को तीन से चार घंटे का समय लग गया। तेज धूप भी भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। धूप में भी भक्त लाउन में लगे रहे।
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भोर में [Navratri 4th Day] जैसे ही मां दुर्गा मंदिर का पट खुला मां के जयकारे के साथ देवी का दर्शन शुरू हो गया। हर कोई हाथों में नारियल, चुनरी व अड़हुल की माला लेकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा था। भोर में डमरूओं के निनाद से मां का दरबार गूंजता रहा। इस अवसर पर पूरे दुर्गा मंदिर को विद्युत झालरों व फूल मालाओं से भव्य ढंग से सजाया गया था। डमरूओं के निनाद के साथ मां का पट खोला गया। मंदिर परिसर में पुलिसकर्मियों व महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगायी गई थी। बाहर दुकानों पर लोगों ने नारियल, चुनरी व अड़हुल की मालाओं की खरीदारी की। अड़हुल की माला व नारियल रोज की अपेक्षा महंगें बिक रहे थे।
Navratri 4th Day: कुष्मांडा का शाब्दिक अर्थ बलि
टाउनहाल स्थित सार्वजनिक दुर्गोत्सव के पंडाल में चल रहे शक्तिमाला प्रवचन के चौथे दिन [Navratri 4th Day] दिल्ली से आये आचार्य पं. डा. जनार्दन पांडेय का प्रवचन हुआ। उन्होंने मां कुष्मांडा देवी के बारे में बताते हुए कहा कि मां कुष्मांडा देवी के स्वरूप का दर्शन करने से समस्त प्राणियों की व्याधि व रोग का शमन होता है। उनके दर्शन मात्र से हर किसी के जन्म जन्मांतर का पाप नष्ट हो जाता है। कलियुग में चंडी व विनायक तथा हनुमान का विशेष प्रधानता हा। साधकों व उपासकों के लिए यह विशेष उत्सव का दिवस है। इसलिए समस्त सांसारिक प्राणियों को मां के इस रूप से अपने आप को पवित्र करने का विधान है।
कुष्मांडा का शाब्दिक अर्थ बलि होता है। क्योंकि आज के दिन लोग भतुए का बलि भी मां को चढ़ाते हैं। इसे कुष्मांड कहा जाता है। इस अवसर [Navratri 4th Day] पर पं. रामसूरति द्विवेदी का भी प्रवचन हुआ। इस अवसर पर पं. बैकुंठनाथ मिश्र, हंसरार मिश्र, तिलकराज मिश्र, धर्मराज मिश्र, राजन यादव, अमन कबीर, रितेश अग्रवाल समेत काफी लोग मौजूद थे। अंत में मां की आरती हुई।