- Nikay Chunav: महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के टिकट बंटवारे से कार्यकर्ता है खफा
- भाजपा, कांग्रेस और सपा में इसको लेकर चल रही है खासी नाराजगी
जितेंद्र श्रीवास्तव
वाराणसी। महापौर और पार्षद पद के लिए टिकट बंटवारे को लेकर हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ता बेहद खफा है। किसी संगठन के कार्यकर्ता खुलकर इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं तो अन्य संगठनों में जमकर विरोध हो रहा है। यहां तक कि संगठन के महानगर अध्यक्ष के समक्ष नारेबाजी तक हुई। ऐसे में नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का जिम्मा संगठन के जिम्मेदार लोगों को सौंपा गया है। ऐसे लोग खफा कार्यकर्ताओं को मनाने में जुट गए हैं। मान-मनौव्वल का दौर लगातार जारी है। संगठन के लोगों का कहना है कि यह नाराजगी क्षणिक है। समय रहते सब ठीक कर लिया जाएगा।
बात चाहे सत्ताधारी दल भाजपा की हो या फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी। यहां तक कि बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी। पार्टी सूत्रों की मानें तो सभी राजनीतिक दल में महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ता खफा है। अब हरेक कार्यकर्ता को खुश रखना संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के जिम्मे हैं। जिम्मेदार लोगों का कहना है कि हर वार्ड से कई-कई कार्यकर्ता पार्षद पद के लिए टिकट की आस लगाए हुए थे। सभी को टिकट तो मिल नहीं सकता। शीर्ष नेतृत्व ने जो फैसला किया है, उसे स्वीकार करते हुए संगठन हित में काम करना होगा।
बात भाजपा की करें तो टिकट वितरण को लेकर तमाम कार्यकर्ता नाखुश है। कई कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान से यहां तक कह दिया कि जनप्रतिनिधियों ने चहेतों को टिकट दिलाने के चक्कर में जुझारू और कर्मठ कार्यकर्ताओं के मेहनत की अनदेखी कर दी। यह बात शीर्ष नेतृत्व से छुपाया गया। जबकि ऐसे कार्यकर्ता कई साल से अपने-अपने वार्ड में दिन-रात मेहनत करते हुए पार्षदी चुनाव की तरफ आस लगाए हुए थे। उनके सपनों पर अब पानी फिर गया है। इसी प्रकार, महापौर पद के लिए कई लोग लाइन में लगे हुए थे। लेकिन अचानक नया नाम सामने ला दिया गया। हालांकि जिसके नाम पर मुहर लगी है। उनके काम को कमतर नहीं आंका जा सकता है। संगठन में उनकी बेहतर छवि रही है और उन्होंने संगठन को नया मुकाम दिलाने में महती भूमिका अदा की है। लेकिन इसी तरह संगठन के लिए दिन-रात मेहनत करने वालों के मंसूबों पर पानी फिर गया तो उनका गुस्सा लाजिमी है। लेकिन कोई बात नहीं, यह गुस्सा कुछ दिन रहेगा और मतदान करीब आते-आते सभी एकजुट होकर महापौर और पार्षद प्रत्याशियों को विजयी बनाने के लिए लग जायेंगे।
बात कांग्रेस की करें तो इस संगठन में भी कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गयी है। इसको लेकर कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखने और सुनने को मिल रही है। ऐसे कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्षदी के टिकट वितरण में धनबल का खुलकर प्रयोग हुआ है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अपने चेहते को टिकट दिलाने में महती भूमिकी निभाई। जबकि प्रदेश इकाई का कहना था कि हमें निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना है और इसके लिए पुराने टिकाऊ-जिताऊ कार्यकर्ताओं को तवज्जों दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी में तो पार्षदी टिकट वितरण से खफा कार्यकर्ताओं ने तो महानगर अध्यक्ष के खिलाफ एक तरह से मोर्चा ही खोल दिया है। महानगर अध्यक्ष के समक्ष नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने पैसा लेकर टिकट बांटने का आरोप तक लगा दिया था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संगठन को जिंदा रखने और पब्लिक के बीच काम करने वालों को दरकिनार कर दिया गया। महापौर के टिकट वितरण में भी कर्मठ और जिताऊ उम्मीदवार की अनदेखी की गयी। ऐसे में चुनाव के दौरान भितरघात का सामना चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों को करना पड़ सकता है। हालांकि कांग्रेस और सपा के स्थानीय दिग्गज और वरिष्ठ नेता नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में जुट गए है। अब देखना यह है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संगठन का शीर्ष नेतृत्व कैसे दूर करता है।

