एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी [Owaisi] ने बीते 25 अप्रैल को वाराणसी नाटीइमली में पीडीएम न्याय मोर्चा की जनसभा में भागीदारी की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आरएसएस, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। असदुद्दीन ओवैसी [Owaisi] के बयान को लेकर भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने नाराजगी जताते हुए चुनाव आयोग से उनके खिलाफ शिकायत की है। इसके बाद अब ओवैसी को जिला निर्वाचन अधिकारी वाराणसी की तरफ से नोटिस जारी कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने 7 दिन के अंदर इसे लेकर जवाब माँगा है। यह नोटिस अपना दल [कमेरावादी] के जिलाअध्यक्ष दिलीप सिंह पटेल को और उनके माध्यम से असदुद्दीन ओवैसी को जारी किया गया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह नोटिस अपना दल [कमेरावादी] के जिलाअध्यक्ष दिलीप सिंह पटेल को इसीलिए जारी किया गया है क्योंकि वाराणसी में अपना दल की जनसभा कराने की अनुमति उन्होंने ही ली थी और इसकी जिम्मेदारी उन्होंने ही उठाई थी। इसीलिए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ साथ उनके लिए यह नोटिस जारी किया गया है।

शशांक शेखर त्रिपाठी ने Owaisi के खिलाफ दर्ज की थी शिकायत
बता दें कि विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने शुक्रवार को शिकायत दर्ज की थी अपने शिकायत में उन्होंने बताया कि ओवैसी [Owaisi] ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊपर कई गलत, झूठ, अनर्गल आरोप और अल्पसंख्यक समाज को भड़काकर उनका ध्रुवीकरण करने के लिए भी कई प्रकार के गलत व झूठे बयान दिए। समाज की धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया गया, मैंने निर्वाचन आयोग में इसकी शिकायत की है।
गौरतलब हो कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी [Owaisi] ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा दलित, पिछड़ा, आदिवासी और मुसलमान हैं। बुलडोजर से घर हमारा तोड़ा जाता है। पैर में गोली हमारे मारी जाती है और जेल में जहर हमें दिया जाता है। इसलिए हम चाहते हैं कि हम सिर्फ वोट डालने वाले न रह जाएं। हम वोट लेने वाले भी बनें। ओवैसी ने कहा कि मुख्तार अंसारी न्यायिक अभिरक्षा में मार दिए गए। वह शहीद हैं और ऐसे लोग कभी मरा नहीं करते, वो जिंदा रहते हैं। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की थी, मगर वह नाकाम रही।