अजमेर सिविल कोर्ट ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। अदालत ने इस मामले में अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 20 दिसंबर 2024 को होगी।
अजमेर कोर्ट में दाखिल याचिका में किए गए दावे
- याचिका में पूर्व जज हरविलास शारदा की 1911 में प्रकाशित किताब “अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव” का हवाला दिया गया है।
- इस किताब में कहा गया है कि दरगाह परिसर में मंदिर के मलबे का उपयोग किया गया था। इसमें 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे की निर्माण शैली, तहखाने में शिवलिंग और परिसर में जैन मंदिर के अवशेषों का उल्लेख किया गया है।
- दावे के मुताबिक, मंदिर के पास पानी का झरना और पेड़ जैसे हिंदू परंपरा से जुड़े तत्व मौजूद हैं।
- याचिका में दरगाह परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है।
याचिका की प्रमुख मांगें
- ASI सर्वेक्षण: याचिका में दरगाह परिसर की संरचनात्मक जांच के लिए अपील की गई है।
- अवैध कब्जे हटाने: याचिका में कहा गया है कि दरगाह पर अवैध निर्माण को हटाया जाए।
- पूजा का अधिकार: क्षेत्र में मंदिर में पूजा-अर्चना का अधिकार बहाल करने की मांग की गई है।
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दरगाह कमेटी की प्रतिक्रिया
दरगाह कमेटी की ओर से फिलहाल इस मामले में विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। यह मामला धार्मिक स्थल के इतिहास और संरचना से संबंधित विवादों में एक नई कड़ी है। अदालत के फैसले और पुरातात्विक सर्वेक्षण के नतीजे इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण होंगे।
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