Varanasi की अदालत में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न्यायालय परिसर को किसी किले में बदल दिया। पूर्व आईपीएस और आज़ाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान अदालत के भीतर और बाहर सुरक्षा का ऐसा घेरा बना कि हर कदम पर तनाव और टकराव की आहट महसूस की जा सकती थी।
कोर्ट के भीतर का पल
स्पेशल सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान जज ने अमिताभ ठाकुर को कुर्सी पर बैठने का इशारा किया। लेकिन माहौल सहज नहीं था—ठाकुर पुलिस के रवैए से असंतुष्ट दिखे और उनकी बहस पुलिसकर्मियों (Varanasi) से हो गई। अदालत ने उन्हें 24 घंटे की रिमांड पर लिया, जबकि उनके वकील ने दलील दी कि दर्ज धाराओं में से दो असंगीय अपराध की श्रेणी में आती हैं, जिनमें रिमांड का प्रावधान ही नहीं है।
Varanasi: कोर्ट से जेल तक का सफ़र
पेशी के बाद जब पुलिस उन्हें वाराणसी जेल ले जाने लगी, तो नज़ारा और भी असामान्य था। लगभग 200 पुलिसकर्मी (Varanasi) लगातार सीटी बजाते रहे ताकि उनकी आवाज़ मीडिया तक न पहुंचे। यह दृश्य अदालत परिसर में मौजूद हर व्यक्ति के लिए चौंकाने वाला था। बताया गया कि 24 घंटे बाद उन्हें देवरिया जेल स्थानांतरित किया जाएगा।
सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा
हिंदू संगठनों के आक्रोश को देखते हुए वाराणसी कोर्ट परिसर को अभेद्य सुरक्षा में बदल दिया गया। 500 पुलिसकर्मी (Varanasi) बुलेटप्रूफ जैकेट में तैनात रहे, हर गेट पर 100 जवान खड़े किए गए। कोर्ट के भीतर मौजूद लोगों और गाड़ियों को बाहर निकाल दिया गया। डीसीपी काशी ज़ोन गौरव बंसवाल खुद भारी फोर्स के साथ अदालत पहुंचे।

