Preparation for Mission 2024
- एक बूथ 20 यूथ की नयी रणनीति पर शुरू हुआ काम
- बूथ स्तर पर मजबूती के लिए प्रभारियों को दी गयी जिम्मेदारी
वाराणसी। निकाय चुनाव और उप चुनावों से खाली होने के बाद समाजवादी पार्टी (Mission 2024) की नजर अब आगामी लोकसभा चुनाव पर टिक गयी है। पार्टी के रणनीतिकारों ने बूथ प्रबंधन को जीत का मंत्र बनाने का संकल्प लिया है। जी हां, सपा ने मिशन-2024 की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी ने एक बूथ 20 यूथ की नई रणनीति पर (Mission 2024) काम करना शुरू कर दिया है।
बूथ स्तर पर पार्टी की मजबूती के लिए सभी प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है। पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी नेताओं को जिला स्तर पर मजबूत संगठन निर्माण के साथ ही विभिन्न बिंदुओं पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो आगामी लोकसभा चुनाव (Mission 2024) को लेकर बूथ प्रबंधन पर विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है। बूथ प्रबंधन में मैनपुरी मॉडल भी अपनाया जाएगा। इसके तहत एक कमेटी अलग से संबंधित लोकसभा क्षेत्र का सियासी तापमान नापेगी। पार्टी परंपरागत वोट बैंक के साथ अति पिछड़ों और दलितों पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। संगठन (Mission 2024) में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी, इस पर काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जातीय जनगणना, उत्पीड़न को मुद्दा बनाएंगे। पार्टी के फ्रंटल संगठन उच्च शिक्षा संस्थानों की फीस और भर्ती, छात्रसंघ चुनाव और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी को मुद्दा बनाएंगे।
पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि बूथ की कमेटी बहुस्तरीय होनी चाहिए। इसमें संबंधित बूथ की आबादी के हिसाब से अलग-अलग जाति के कार्यकर्ताओं का चयन किया जाए। लेकिन, इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि संबंधित बूथ पर किसी बिरादरी के दो-चार परिवार हैं तो संबंधित बिरादरी का कार्यकर्ता भी कमेटी में होना चाहिए, ताकि वह अपनी बिरादरी के प्रत्येक मतदाताओं को बूथ तक ला सके।
पार्टी सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेताओं का यह भी कहना है कि जहां हर जाति के लोग हैं, उसमें अति पिछड़ों एवं दलितों की भागीदारी बढ़ाई जाए। दलितों में यह सुनिश्चित किया जाए कि उनकी अलग-अलग जातियों के कार्यकर्ता बूथ में अनिवार्य रूप से रहें। पार्टी ने प्रत्येक जिलों के वरिष्ठ नेताओं एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को अल्पसंख्यक वोट बैंक (Mission 2024) को भी सहेजे रखने पर जोर देने को कहा गया है। यह भी कहा गया है कि अल्पंसख्यकों के बीच अधिक से अधिक बैठक की जाए और उनको इस बात का विश्वास दिलाया जाए कि सपा (Mission 2024) ही उनके हितों की रक्षा कर सकती है।
Mission 2024: आंकाओं की परिक्रमा करने वालों को न दे तवज्जो
पार्टी सूत्रों की मानें तो आंकाओं की परिक्रमा करने और पार्टी कार्यालयों का चक्कर लगाने वालों को तवज्जो न देकर बूथ पर संघर्ष करने वालों को तरजीह दी जानी चाहिए, इस पर भी शीर्ष नेताओं का पूरा फोकस है। पार्टी की शीर्ष महिला नेताओं ने जिला से लेकर बूथ स्तर पर सभी कमेटियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। कहा है कि महिलाओं को हर हाल में सम्मान दिया जाए, तभी संगठन में मजबूती आएगी और एक-एक महिला मतदाता को बूथ तक लाने में हम कामयाब होंगे।
महिला सभा की पदाधिकारियों को विभिन्न संयोजन समितियों के जरिए जोड़ने पर भी बल दिया जा रहा है। इसके लिए महिला सभा को पूरी तरह से सक्रिय करने को कहा गया है। यह भी कहा गया है कि महिला सभा की पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकत्रियां एक-एक बूथ को मंथने का काम करें। बूथ के एक-एक लोगों के घरों में जाएं और पार्टी की नीतियों से अवगत कराते हुए आधी आबादी को पार्टी से जोड़ने पर फोकस करें।
तय होगी नेताओं की जवाबदेही
पार्टी सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आगामी लोकसभा चुनाव (Mission 2024) में अधिक से अधिक सीट पार्टी पक्ष में करने के लिए हर रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जिन-जिन नेताओं को पार्टी की तरफ से किसी लोकसभा क्षेत्र या विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जाएगी, उससे वहां की पूरी व्यवस्था की रिपोर्ट ली जाएगी। संबंधित क्षेत्र में जाने के बाद नेता ने क्या बदलाव किया और उसका क्या परिणाम रहा, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।
जो लोग पार्टी की उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं देते हैं, उन्हें भविष्य में ऐसी जिम्मेदारी देने से बचा जाएगा। कहने का आशय यह कि अब सिर्फ नेताओं या सक्रिय कार्यकर्ताओं को पद नहीं दिया जाएगा, बल्कि उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी।
फ्रंटल संगठनों को सौंपी गयी यह जिम्मेदारी
पार्टी सूत्रों की मानें तो फ्रंटल संगठनों को भी कुछ जिम्मेदारी सौंपी गयी है। फं्रटल संगठन अलग-अलग मुद्दे को अपना एजेंडा बनाएंगे। युवजन सभा, लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड जहां बेरोजगारी पर विशेष रूप से फोकस करेगी। वहीं, छात्रसभा विभिन्न संस्थानों में हो रही नियुक्ति, बेरोजगारी की बढ़ती दर, छात्रसंघ चुनाव को मुद्दा बनाकर उन्हें पार्टी से जोड़ेगी। इसको लेकर फ्रंटल संगठनों को सक्रियता से काम करने पर बल दिया गया है।