कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ वाराणसी के MP/MLA कोर्ट में सोमवार में सुनवाई हुई. यह सुनवाई दो अलग-अलग मामलों की गई. इन मामलों की सुनवाई को लेकर आदालत ने राहुल गाँधी को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होने के लिए तलब किया था लेकिन बावजूद इसके वह उपस्थित नहीं हुए . इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक तारीख मुकर्रर करते हुए निचली अदालत से पूरे मामले की पत्रावली तलब कर ली है।
भगवान श्रीराम को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के मामले में अपर जिला जज MP/MLA कोर्ट पंचम ने अब 13 अप्रैल को अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने इस मामले से जुड़ी फाइलें लोवर कोर्ट से मंगाने का आदेश दिया है।
राम को‘काल्पनिक’ बताने केआरोप में मामला
दरअसल, आरोप है कि राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को ‘पौराणिक’ बताते हुए उस युग की कथाओं को काल्पनिक बताया था। इस बयान को लेकर हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने अदालत में याचिका दाखिल की थी।
इस मामले में मुकदमा संख्या 486/2025 (हरिशंकर पांडेय बनाम राहुल गांधी) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछली तारीख पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को 16 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। हालांकि निर्धारित तिथि पर वह अदालत में पेश नहीं हुए।
अदालत ने अब निचली अदालत से पूरी पत्रावली तलब कर ली है और अगली सुनवाई 13 अप्रैल को तय की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई से इस मामले में एकपक्षीय सुनवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
Rahul gandhi का सिखों को लेकर बयान वाला रहा मामला
इसी के साथ सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान से जुड़े मामले की भी सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई वाराणसी की ACJM MP/MLA कोर्ट में हुई।
तिलमापुर के पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्रा की ओर से दायर 173(4) के प्रार्थना पत्र पर MP/MLA कोर्ट के जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में भी निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख (Rahul Gandhi) निर्धारित की है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय के अनुसार, राहुल गांधी के खिलाफ यह याचिका पहले 12 मई को MP/MLA कोर्ट में दाखिल की गई थी। हालांकि उस समय अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। बाद में इस फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई फिर से शुरू कर दी है।

